आज हम 21वीं सदी मे प्रवेष कर चुके है, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। इस प्रगति ने जहां एक और ब्रह्माण्ड के अनेक रहस्यों को सुलझाया है । वही दूसरी और मानव का अनेकानेक सुख सुविधाएं प्रदान की है। इन मानवीय प्रगति एवं विकास मे पर्यावरण तो सदैव सहायक रहा है, परन्तु इस विकास की दौड़ मे हमने पर्यावरण की उपेक्षा की और उसका अनियन्त्रित शोषण किया है। तात्कालिक लाभों के लालच...
बापू के जीवन का संदेष था ’’वह जो सचमुच में भीतर से स्वच्छ है। वह अस्वच्छ बनकर नही रह सकता‘‘ बापू जी सफाई पर बहुत जोर देते थे। बापू का विष्वास था कि स्वच्छता समग्र होनी चाहिये। और इसमें सब सामिल हों। गंदे और दूषित दिमाग में स्वच्छ विचार उत्पन्न नही हो सकते है और एक निर्मल स्वच्छ व्यक्ति अपने आसपास गंदगी मंे नही रह सकते है।प्रस्तुत शोध समग्र स्वच्छता अभियान के प्रति जागरूकता का विकास करने एक प्रयास...
पर्यावरण शब्द की उत्पत्ति परि ़ आवरण शब्द से हुई है। सृष्टि को सभी ओर से घेरने वाला, स्वच्छ आवरण है। शुद्ध पर्यावरण के बिना जीवन असंभव है। पर्यावरण प्रकृति प्रदत्त हवा, पानी जमीन आदि से मिलकर बना है। पर्यावरण को संतुलित बनाये रखना आवष्यक है। संतुलन बिगड़ने से जीवन खतरे में पड़ सकता है। औद्योगिक विकास तथा भौतिक सुख-सुविधा के लिए लगातार पर्यावरण का हृास होता जा रहा है।
लगातार जंगलों की कटाई होने से...
पर्यावरण शब्द परि$आवरण शब्दों से मिलकर बना है, इसका शाब्दिक अर्थ हमारे चारों ओर के उस वातावरण से है, जिसमें जीवधारी रहते हैं। इस प्रकार पर्यावरण भौतिक तथा जैविक अवयव या कारक का वह सम्मिश्रण है, जो चंहु ओर से जीवधारियों को प्रभावित करता है। इस प्रकार पर्यावरण जीवों को प्रभावित करने वाले समस्त भौतिक एवं जैविक कारकों का योग होता है। यह कहा जा सकता है कि हमारी पृथ्वी का पर्यावरण वह बाहरी शक्ति है...