Skip Navigation
Granthaalayah: Open Access Research Database
A Knowledge Repository
By Granthaalayah Publications and Printers
Home Browse Resources Get Recommendations Forums About Help Advanced Search

Browse Resources

Environment

Resources
View Resource “विश्वविद्यालयीन विद्यार्थियों में पर्यावरण जागरूकता: एक अध्ययन” (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के संदर्भ में)

आज हम 21वीं सदी मे प्रवेष कर चुके है, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। इस प्रगति ने जहां एक और ब्रह्माण्ड के अनेक रहस्यों को सुलझाया है । वही दूसरी और मानव का अनेकानेक सुख सुविधाएं प्रदान की है। इन मानवीय प्रगति एवं विकास मे पर्यावरण तो सदैव सहायक रहा है, परन्तु इस विकास की दौड़ मे हमने पर्यावरण की उपेक्षा की और उसका अनियन्त्रित शोषण किया है। तात्कालिक लाभों के लालच...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3230
View Resource ‘‘किशनगढ़ शैली का पर्यावरण-प्रकृति चित्र्ाण की सांस्कृतिक परम्परा’’

‘‘राजस्थान की किशनगढ़ श्©ली के चित्र्ा प्रकृति क¨ संरक्षित करके पर्यावरण जागरुकता क¨ आज के परिवेश में प्रदर्शित करते हैं। चित्र्ा¨ं में वनस्पति, जल, वायु तीन¨ं पर्यावरणीय घटक प्रचुर मात्र्ाा में चित्र्ाित हैं। पर्यावरण में प्रकृति चित्र्ाण के साथ अध्यात्म दर्शन की सांस्कृतिक परम्परा क¨ ज¨ड़ा गया है। हरियालीमय सुरम्य वातावरण चित्र्ा¨ं मंे प्रकृति चित्र्ाण की सांस्कृतिक थाती पर्यावरण प्रदूषित ह¨ने से...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3232
View Resource नवीं कक्षा के विद्यार्थियों का कुक्षी में चल रहे समग्र स्वच्छता अभियान के प्रति जागरूकता का विकास

बापू के जीवन का संदेष था ’’वह जो सचमुच में भीतर से स्वच्छ है। वह अस्वच्छ बनकर नही रह सकता‘‘ बापू जी सफाई पर बहुत जोर देते थे। बापू का विष्वास था कि स्वच्छता समग्र होनी चाहिये। और इसमें सब सामिल हों। गंदे और दूषित दिमाग में स्वच्छ विचार उत्पन्न नही हो सकते है और एक निर्मल स्वच्छ व्यक्ति अपने आसपास गंदगी मंे नही रह सकते है।प्रस्तुत शोध समग्र स्वच्छता अभियान के प्रति जागरूकता का विकास करने एक प्रयास...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3233
View Resource महाविद्यालय के छात्रा/छात्राओं में पर्यावरण संबंधी ज्ञान का स्तर

पर्यावरण शब्द की उत्पत्ति परि ़ आवरण शब्द से हुई है। सृष्टि को सभी ओर से घेरने वाला, स्वच्छ आवरण है। शुद्ध पर्यावरण के बिना जीवन असंभव है। पर्यावरण प्रकृति प्रदत्त हवा, पानी जमीन आदि से मिलकर बना है। पर्यावरण को संतुलित बनाये रखना आवष्यक है। संतुलन बिगड़ने से जीवन खतरे में पड़ सकता है। औद्योगिक विकास तथा भौतिक सुख-सुविधा के लिए लगातार पर्यावरण का हृास होता जा रहा है। लगातार जंगलों की कटाई होने से...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3234
View Resource पर्यावरण एवं भारत में विधिक प्रावधान

पर्यावरण शब्द परि$आवरण शब्दों से मिलकर बना है, इसका शाब्दिक अर्थ हमारे चारों ओर के उस वातावरण से है, जिसमें जीवधारी रहते हैं। इस प्रकार पर्यावरण भौतिक तथा जैविक अवयव या कारक का वह सम्मिश्रण है, जो चंहु ओर से जीवधारियों को प्रभावित करता है। इस प्रकार पर्यावरण जीवों को प्रभावित करने वाले समस्त भौतिक एवं जैविक कारकों का योग होता है। यह कहा जा सकता है कि हमारी पृथ्वी का पर्यावरण वह बाहरी शक्ति है...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3235
← Previous Next →