बापू के जीवन का संदेष था ’’वह जो सचमुच में भीतर से स्वच्छ है। वह अस्वच्छ बनकर नही रह सकता‘‘ बापू जी सफाई पर बहुत जोर देते थे। बापू का विष्वास था कि स्वच्छता समग्र होनी चाहिये। और इसमें सब सामिल हों। गंदे और दूषित दिमाग में स्वच्छ विचार उत्पन्न नही हो सकते है और एक निर्मल स्वच्छ व्यक्ति अपने आसपास गंदगी मंे नही रह सकते है।प्रस्तुत शोध समग्र स्वच्छता अभियान के प्रति जागरूकता का विकास करने एक प्रयास है । प्रस्तुत शोध में धार जिले के कुक्षी क्षेत्र में स्थित विद्यालय में कक्षा 9वीं के 35 विद्यार्थियों को प्रायोगिक समूह के रूप में चयनित किया गया। समग्र स्वच्छता अभियान के प्रति जागरूकता प्रष्नावली का निर्माण किया गया। र्पूव व पश्च परीक्षण प्रकल्प द्वारा प्रदत्तों को संकलन किया गया। प्रदतों का विष्लेषण टी परीक्षण द्वारा किया गया । प्राय¨गिक समूह के विद्यार्थियों के र्पूव व पश्च समग्र स्वच्छता अभियान के प्रति जागरूकता प्राप्तांकों में सार्थक अन्तर है। अतः निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि समग्र स्वच्छता अभियान के प्रति जागरूकता कार्य ्रकम सार्थक रूप में प्रभावी रहा ।
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