पर्यावरण शब्द की उत्पत्ति परि ़ आवरण शब्द से हुई है। सृष्टि को सभी ओर से घेरने वाला, स्वच्छ आवरण है। शुद्ध पर्यावरण के बिना जीवन असंभव है। पर्यावरण प्रकृति प्रदत्त हवा, पानी जमीन आदि से मिलकर बना है। पर्यावरण को संतुलित बनाये रखना आवष्यक है। संतुलन बिगड़ने से जीवन खतरे में पड़ सकता है। औद्योगिक विकास तथा भौतिक सुख-सुविधा के लिए लगातार पर्यावरण का हृास होता जा रहा है।
लगातार जंगलों की कटाई होने से वर्षा के स्त्रोत के का नष्ट होना, वन्य जीव के जीवन नष्ट करना ही पर्यावरण को असंतुलित बना रहा है। पर्यावरण के महत्वपूर्ण अंग के रुप में वनों की भूमिका विकास के लिए अत्यंत आवष्यक है।
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