सृष्टि के प्रारम्भ से वर्तमान युग तक मनुष्य ने विकास की लम्बी यात्रा तय की है। किन्तु इस यात्रा में वह जीवन के शाश्वत सत्य को पीछे छोड़कर अकेला आगे निकल आया है जिसके परिणाम में पर्यावरण की प्रलयंकारी समस्याओं ने जन्म ले लिया है और विश्व समुदाय विगत कई दशकों से इनसे जूझता हुआ आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है। 1972 में इसकी गम्भीरता को देखते हुए स्टाॅकहोम में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन आयोजित किया गया...
सामाजिक पर्यावरण ;ठपव ैवबपंस म्दअपतवदउमदजद्धमें परिवर्तित हो रहा है फलस्वरूप पर्यावरण संघटों के मौलिक गुणों में परिर्वतन हो रहा है। स्वस्थ जीवन के लिए पर्यावरणीय परीक्षण आवश्यक है, विकास के संचालन के लिए नत्य व अनत्य संसाधनों को उपयोग दुर्लभ एवं अमूल्य संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता ने पर्यावरण प्रबन्धन को अव्यन्त महत्वपूर्ण बना दिया है। 1
पर्यावरण के प्रति सचेत संवदेनशील तथा जागरूक बनाया जाना...
विश्व प्रकृति निधि भारत का हमेशा ही यह उद्देश्य रहा है कि हम प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के साथ दीर्घकालिक तथा न्याय संगत विकास करने में सहभागी बनें।1
जब तक हमारे पर्यावरण में बाह्य पदार्थ आकर मिलते हैं संदृषण होता है। प्रारम्भ में यह अल्प मात्रा में होता है, जिससे एक स्तर तक मनुष्य को कोई हानि नहीं पहुँचती तब तक यह संदूषण की श्रेणी में, लेकिन जैसे ही इस सीमा का उल्लंघन होता है तो यह दूषण संदूषण...
भौगोलिक दृष्टि से मध्य प्रदेश भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है जिसकी कुल जनसंख्या 7 करोड़ 25 लाख है तथा नगरीय जनसंख्या 20069806 है मध्य प्रदेश मे नगरीकरण अनुपात 27.63ः है। जो राष्ट्रीय अनुपात से कम है। परंतु कुल नगरीय जनसंख्या की दृष्टि से भारत के कई राज्यों की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा है। वर्तमान मे मध्य प्रदेश मे प्रशासनिक रूप से 51 जिलों मे कुल 242 तहसील तथा 313 विकासखण्डों मे विभक्त है। राज्य...
वर्तमान में हम जिस वातावरण एवं परिवेष द्वारा चारों ओर से घिरे है उसे पर्यारण कहते है। पर्यावरण में सभी घटकों का निष्चित अनुपात में संतुलन आवष्यक है, किन्तु मनुष्य की तीव्र विकास की अभिलाषा एवं प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के कारण यह संतुलन धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है।
पृथ्वी पर निरंतर बढ़ती जनसंख्या आज विष्व में चिंता का प्रमुख कारण बन रही है, क्योंकि जनसंख्या वृद्धि ने लगभग सभी देषों को किसी न किसी...