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समाजिक समस्याऐं व पर्यावरण

सामाजिक पर्यावरण ;ठपव ैवबपंस म्दअपतवदउमदजद्धमें परिवर्तित हो रहा है फलस्वरूप पर्यावरण संघटों के मौलिक गुणों में परिर्वतन हो रहा है। स्वस्थ जीवन के लिए पर्यावरणीय परीक्षण आवश्यक है, विकास के संचालन के लिए नत्य व अनत्य संसाधनों को उपयोग दुर्लभ एवं अमूल्य संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता ने पर्यावरण प्रबन्धन को अव्यन्त महत्वपूर्ण बना दिया है। 1
पर्यावरण के प्रति सचेत संवदेनशील तथा जागरूक बनाया जाना भी बेहद जरूरी है, लोगो को यह समझाया जाना आवश्यक है कि आखिर हमारा पर्यावरण या परिस्थितिक तंत्र कैसे प्राकृतिक आपदाओं से हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करता है तथा पर्यावरण का संरक्षण व सवर्द्धन तथा उसको वैश्विक स्तर पर मानवीय हस्तक्षेप के कारण जिस प्रकार पर्यावरण संतुलन तथा पारिस्थितिक को लगातार क्षति पहुचायी गयी है, उससे न सिर्फ मौसम, जलवायु तथा अन्य प्रकार की भौगोलिक परिस्थितियों में अप्रत्यशित परिवर्तन देखने को मिले बल्कि प्राकृतिक आपदाओं की दर तथा पर्यावरण को हुई क्षति के लिए परस्पर एक-दूसरे पर दोषारोपण करने के वजाय विश्व के सभी देशों को आपस में परस्पर समन्वय सम्बन्ध स्थापित करके इसकी भरपाई के लिए प्रयास करने चाहिए। हमार लिए विकास जरूरी है मगर पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्द्धन उससे कही अधिक जरूरी है।
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Publisher
Classification
Date Issued 2015-09-30
Resource Type
Format
Language
Date Of Record Creation 2021-04-13 04:32:51
Date Of Record Release 2021-04-13 04:32:51
Date Last Modified 2021-04-13 04:32:51

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