Skip Navigation
Granthaalayah: Open Access Research Database
A Knowledge Repository
By Granthaalayah Publications and Printers
Home Browse Resources Get Recommendations Forums About Help Advanced Search

Browse Resources

Environment

Resources
View Resource पर्यावरण संरक्षण (संगीत के माध्यम से)

मानव शरीर पंच तत्वों- प्रथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश से ही बना है। ये सभी तत्व पर्यावरण के धोतक है। प्रकृति मे मानव को अनेक महत्वपूर्ण प्राकृतिक सम्पदायें भी है। जिसका उपयोग मनुष्य अपने दैनिक जीवन में करता आया है जैसे- नदियाँ, पहाड़, मैदान, समुद्र, पेड़-पौधे, वनस्पति इत्यादि। प्रथ्वी पर प्राकृतिक संसाथनों का दोहन करने से प्राकृतिक संसाथनो के भण्डार तीव्र गति से घटते जा रहे है, जिससे पर्यावरण में...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3263
View Resource हिंदी-साहित्य में प्रकृति

हिंदी साहित्यकारों का प्रकृति-प्रेम सर्वविदित है। आदिकाल , मध्यकाल और आधुनिककाल सभी कालों में प्रकृति पर काव्य-रचनाऐं होती रहीं । प्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकरप्रसादजी लिखते हैं- ले चल मुझे भुलावा देकर मेरे नाविक धीरे-धीरे-जहाँ निर्जन में सागर-लहरी-अंबर के कानों में गहरी-निच्छल प्रेमकथा कहती हो--तज कोलाहल की अवनि कवि ने यहाँ मानव की शांतिप्रियता को इंगित किया है ।मानव कोलाहलप्रिय नहीं है, और न ही...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3264
View Resource खेती के नये आयामः समझौता कृषि

बढ़ती जनसंख्या, बदलती जीवन शैली, कृषिगत उत्पादों का व्यवासायीकरण के साथ साथ मौसमी परिवर्तनशीलता, उत्पादन प्रवृत्ति मे बदलाव और कृषिगत विषमता के परिणाम स्वरूप सबसे प्रमुख मुददा कृषि के सुधार और विकास का है। मानव अपने विकास की चाहे जो सीमा निर्धारित कर ले परंतु उसकी उदरपूर्ति जमीन से उगे आनाज या उसके प्रसंस्करण से ही होगी। कृषि के संदर्भ मे तमाम प्रकार के बदलावों के परिणाम स्वरूप कृषि प्रणाली मे भी...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3265
View Resource पर्यावरण संरक्षण एवं हिन्दू धर्म

पर्यावरण के अन्तर्गत वायु जल भूमि वनस्पति पेड़ पौधे, पशु मानव सब आते है । प्रकृति में इन सबकी मात्रा और इनकी रचना कुछ इस प्रकार व्यवस्थित है कि पृथ्वी पर एक संतुलनमय जीवन चलता रहे । विगत करोंड़ांे वर्षो से जब से पृथ्वी मनुष्य पशुपक्षी और अन्य जीव-जीवाणु उपभोक्ता बनकर आये तब से, प्रकृति का यह चक्र निरंतर और अबाध गति से चल रहा है । जिसको जितनी आवष्यकता है व प्रकृति से प्राप्त कर रहा है और प्रकृति आगे...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3267
View Resource स्वच्छताः भारत की चुनौती

किसी भी देश की उन्नति का आधार स्वच्छता व स्वास्थ्य है। स्वच्छ पर्यावरण ही किसी भी समुदाय की स्वास्थ्य स्थिति को ऊंचा उठाने में सहायक है। स्वच्छ पर्यावरण समुदाय के लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में सहायक हो सकता है। साथ ही वह समुदाय मंे रोगों के चक्र को तोड़ने में भी सक्षम है। सरकार व आम जनता के प्रयास व सहभागिता द्वारा विभिन्न संसाधनों का प्रयोग किया जा रहा है और बेहतर परिणाम हेतु प्रयासरत हंै।...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3268
← Previous Next →