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Granthaalayah: Open Access Research Database
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View Resource प्राकृतिक संसाधनोें का संरक्षण

मानव जीवन का अस्तित्व, प्रगति विकास संसाधनों पर निभ्रर करता है । आदिकाल से मनुष्य प्रकृति से विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ प्राप्त कर अपनी आवष्यकताओं को पूरा करता है वास्तव में संसाधन वे है जिनकी उपयोगिता मानव के लिए हो, अन्य जीवों के समान ही मानव भी पर्यावरण का ही एक अंग है परन्तु एक विभिन्नता जो सहज ही परिलक्षित होती है वह यह है कि अन्य जीवों की तुलना में मानव अपने चारों ओर के पर्यावरण को प्रभावित...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3244
View Resource रेडियोधर्मी प्रदूषण का बढ़ता दायराष्ष् मानव के लिए अभिषापष्मानव के लिए अभिषाप

पर्यावरण प्रदूषण एक ऐसी सामयिक समस्या है जिसमें मानव सहित जैव जगत् के लिए जीवन की कठिनाईयाँ बढ़ती जा रही हैं। पर्यावरण के तत्त्वों में गुणात्मक ह्रास के कारण जीवनदायी तत्त्व यथा वायु, जल, मृदा, वनस्पति आदि के नैसर्गिक गुण ह्रसमान होते जा रहे हैं जिससे प्रकृति और जीवों का आपसी सम्बन्ध बिगड़ता जा रहा है। यह सर्वज्ञात है कि पर्यावरण प्रदूषण आधुनिकता की देन है। वैसे प्रदूषण की घटना प्राचीनकाल में भी...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3246
View Resource प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में समाज की भूमिका

भारतवर्ष में प्राचीन शास्त्रों, वेद-पुराणों में, धर्म ग्रन्थो में तथा ऋषि-मुनियों ने पर्यावरण की शुद्धता पर अधिक बल दिया है । वेदों में प्रकृति प्रदत्त पर्यावरण को देवता मानकर कहा गया है कि- ‘‘यो देवोग्नों यो प्सु चो विष्वं भुव नमा विवेष, यो औषधिषु, यो वनस्पतिषु तस्में देवाय नमो नमः’’ अर्थात जो सृष्टि, अग्नि, जल, आकाष, पृथ्वी, और वायु से आच्छादित है तथा जो औषधियों एवं वनस्पतियों में विद्यमान है...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3249
View Resource वैदिक काल में पर्यावरणीय संरक्षण के प्रति चेतना पर एक अध्ययन

प्रस्तुत शोध का उद्देश्य वैदिक काल में पर्यावरणीय संरक्षण के प्रति चेतना का अध्ययन करना है। इस हेतु वेद और उपनिषद् आदि के मंत्रों और सूक्तियों का अध्ययन पर्यावरण चेतना के संबंध में किया गया है। वेदों में पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण और निराकरण, और पर्यावरण के प्रति चेतना का वर्णन मिलता है जो इस बात को सत्यापित करता है कि वैदिक काल में भी पर्यावरण के प्रति चेतना थी जिसे आज के संदर्भ में धारण करने में...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3251
View Resource बरली ग्रामीण महिला विकास संस्थान का पर्यावरण संरक्षण में योगदान का अध्ययन

मनुष्य का जीवन पर्यावरण से प्रभावितहोताहै।स्वस्थ एवंस्वच्छपर्यावरणमानव जीवन काआधारहैं । इसीलिए पर्यावरणकासंरक्षणप्रत्येकनागरिककाकत्र्तव्य है।प्रस्तुत एकल अध्ययन में एक समाजसेवीसंस्था द्वाराअपनेमहिलाप्रषिक्षणार्थियोंकोपर्यावरणसंरक्षण के प्रतिजागरूककरसमाजमेंकार्यकरने के लिए प्रेरितकियाजाताहैं।सौरऊर्जाउपकरणोंकानिर्माणकरउनकाघरेलू एवंव्यावसायिकउपयोगकरना , जैविक खेतीकरना, एवंपर्यावरणप्रदूषणकास्वाथ्य...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3252
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