Skip Navigation
Granthaalayah: Open Access Research Database
A Knowledge Repository
By Granthaalayah Publications and Printers
Home Browse Resources Get Recommendations Forums About Help Advanced Search

रेडियोधर्मी प्रदूषण का बढ़ता दायराष्ष् मानव के लिए अभिषापष्मानव के लिए अभिषाप

पर्यावरण प्रदूषण एक ऐसी सामयिक समस्या है जिसमें मानव सहित जैव जगत् के लिए जीवन की कठिनाईयाँ बढ़ती जा रही हैं। पर्यावरण के तत्त्वों में गुणात्मक ह्रास के कारण जीवनदायी तत्त्व यथा वायु, जल, मृदा, वनस्पति आदि के नैसर्गिक गुण ह्रसमान होते जा रहे हैं जिससे प्रकृति और जीवों का आपसी सम्बन्ध बिगड़ता जा रहा है। यह सर्वज्ञात है कि पर्यावरण प्रदूषण आधुनिकता की देन है। वैसे प्रदूषण की घटना प्राचीनकाल में भी होती रही है लेकिन प्रकृति इसका निवारण करने में सक्षम थी, जिससे इसका प्रकोप उतना भयंकर नहीं था, जितना आज है। चूँकि आज प्रदूषण की मात्रा प्रकृति की सहनसीमा को लाँघ गई है फलतः इसका प्रभाव संकट बिन्दु के समीप पहुँचने लगा है। पर्यावरण प्रदूषण से जल और वायु जैसे जीवनदायी तत्त्व अपनी नैसर्गिक गुणवत्ता खोते जा रहे हैं, वनस्पतियाँ विनष्ट होती जा रही हैं, मौसम का स्वभाव बदल रहा है और मानव विविध बीमारियों के चंगुल में फँसता जा रहा है। यह जैव जगत् के लिए अपषकुन है, क्योंकि पर्यावरण ह्रास से पारिस्थितिकी विनाष के राह में उन्मुख है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले 50 वर्षों तक यदि प्रदूषण की यही गति बनी रही तो महाप्रलय आ सकता है। पष्चिमी औद्योगिक क्रान्ति ने मनुष्य को इस हद तक संवेदनहीन बना दिया है कि वह जिस डाल पर बैठा है उसी को काट रहा है। विकसित देषों के कुछ वैज्ञानिक यह कहने के लिए बाध्य हुए हैं कि पष्चिम के प्रगतिषील राष्ट्र, प्रदूषण का निर्यात गरीब विकासषील देषों में कर रहे हैं।
राष्ट्रीय पर्यावरण शोध संस्थान के अनुसार मनुष्य के क्रिया-कलापों से उत्पन्न अपषिष्टों के रूप में पदार्थ एवं उर्जा विमोचन से प्राकृतिक पर्यावरण में होने वाले हानिकारक परिवर्तनों को प्रदूषण कहा जाता है।पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले प्रदूषकों को उत्पत्ति के आधार पर दो समूहों मेें रखा जा सकता है- (क) प्राकृतिक प्रदूषक तथा (ख) मानव निर्मित प्रदूषक।
?  Cumulative Rating: (not yet rated)
Creator
Publisher
Classification
Date Issued 2015-09-30
Resource Type
Format
Language
Date Of Record Creation 2021-04-12 08:02:39
Date Of Record Release 2021-04-12 08:02:39
Date Last Modified 2021-04-12 08:02:39

Resource Comments

(no comments available yet for this resource)