सृष्टि की प्रत्येक वस्तु में रंग है। मानव जीवन से रंग का नैसर्गिक सम्बन्ध है। जन्म से लेकर मृत्यु तक मानव जीवन रंगों के मध्य ही दृष्टिगोचर होता है। प्रकृति की प्रत्येक रचना चाहे वह सूर्य हो धरणी हो, आकाश हो या वृक्ष हो कोई न कोई रंग लिये हुये हैं। वस्तुओं के धरातल में रंग होने के कारण ही वह हमें दिखाई देती है। रंग के अनुभव का माध्यम प्रकाश है, जो वस्तु से प्रतिबिम्बित होकर हमारे अक्षपटल तक...
शोध सारांष - रंगों का हमारे मस्तिष्क, शरीर व भावनाओं पर गहरा असर पड़ता हैं। रंगों का असन्तुलन रोग का कारण होता है यदि रंगों की चिकित्सा विधि द्वारा इस असन्तुलन को दूर कर दिया ताय तो व्यक्ति स्वस्थ एवं रोग मुक्त हो सकता हैं। प्रस्तुत अध्ययन में यह जानने का प्रयास किया गया है कि रंग चिकित्सा प्रणाली क्या है घ् क्या इससे रोग निदान हो सकता है घ् क्या यह कम खर्चीली पद्धति है घ् आदि बातों को जानने का...
रंग’ अगर शब्द रूप में देखा जाये तो बहुत छोटा है परन्तु यदि इसे सोचा जाए तो दुनिया की प्रत्येक वस्तु में निहित है। अगर रंग नही है तो हमारी जीवनचर्या का अस्तित्व ही नही है। रंग है तो मानव जीवन का अस्तित्व है। माना जाता है कि सभी रंग मूल रूप से श्वेत रंग से ही बने है और रंगों की संख्या अंगणित है। जो हमारी दैनिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है।‘रंग’ जिससे किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व का आभास होता...
मानव जीवन और प्रकृति का संबध पृथ्वी की रचना के साथ अटूट रहा है, मानव ने प्रकृति से प्राप्त सभी चीजों का उपभोग अपने जीवनयापन और मनोरंजन के लिये किया है, एक ओर उसे प्रकृति से भोजन, आवास और वस्त्र प्राप्त होता है तो दूसरी ओर प्रकृति के दृश्यों को देखकर और कलाकारों के द्वारा चित्रित कर शान्ति की अदभूत अनुभूति होती है। सर्वप्रथम कलाकारों द्वारा जो चित्र चित्रित किये गये उनमें प्रकृति चित्रण नदी, पेड़,...
इस संसार में जो कुछ भी अस्तित्व में है जो दृष्टव्य है सबका अपना-अपना रंग है। चाहे बात अंतरिक्ष, ग्रह, नक्षत्रों, पृथ्वी पर पाये जाने वाले पशु, पक्षियों वृक्षों, नदियों, मानवों, मानव निर्मित वस्तुओं आदि किसी की भी हो, सभी वस्तुएँ अनेकानेक रंगों की होने के कारण अपना स्वतन्त्र अस्तित्व रखती है। वे लोग भाग्यशाली है जिन्हें वर्णो का बोध है। वर्ण बोध का कारण ही हमें इस संसार के सौन्दर्य का आभास होता...