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Granthaalayah: Open Access Research Database
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View Resource सुमित्रानंदनपंत के काव्य में प्रकृति-चेतना

पर्यावरण हमारी पृथ्वी पर जीवन का आधार है, जो न केवल मानव अपितु विभिन्न प्रकार के जीव जन्तुओं एवं वनस्पति के उद्भव, विकास एवं अस्तित्व का आधार है। सभ्यता के विकास से वर्तमान युग तक मानव ने जो प्रगति की है उसमें पर्यावरण की महती भूमिका है और यह कहना अतिश्योक्ति न होगी कि मानव सभ्यता एवं संस्कृति का विकास मानव पर्यावरण के समानुकूल एवं सामन्जस्य का परिणाम हैं यही कारण है कि अनेक प्राचीन सभ्यतायंे...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3236
View Resource सामाजिक समस्याएं व पर्यावरण: उच्चतम न्यायालय की भूमिका

पर्यावरण से मानव का गहरा संबंध है। मनुष्य जब से इस पृथ्वी पर आया, उसने पर्यावरण को अपने साथ जोड़े रखा है। सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी, पर्वत, वन, नदियां, महासागर, जल इत्यादि का प्रयोग मनुष्य मानव विकास के आरंभ से करता आ रहा है। मनुष्य अपने दैनिक जीवन में लकड़ी, भोजन, वस्त्र, दवायें इत्यादि प्राप्त करने हेतु प्राकृतिक सम्पदा का शुरू से उपयोग किया है और वर्तमान मे निरंतर जारी है। सामाजिक परिवर्तन के साथ...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3238
View Resource प्राकृतिक आपदा: जल प्लावन और जय शंकर प्रसाद की कामायनी

आलेख श्प्रकृति की घटनाएँ जब चरम रूप ग्रहण कर लेती हैं तो उनसे मानव सहित सम्पूर्ण जैव जगत कठिनाई में पड जाता है और विनाश की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसी घटनाएँ कभी.कभी इतनी त्वरित होती हैं कि संभल पाना कठिन हो जाता है। प्रकृति की इन घटनाओं के सामने मनुष्य बौना हो जाता है जैसे ज्वालामुखीएभूकंप और जल प्लावन आदि। यूं तो ऐसी घटनाएँ प्रकृति की सामान्य प्रक्रिया से जन्म लेती हैंएलेकिन इनकी गहनता और...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3240
View Resource आर्थिक विकास एवं जल प्रदूषण तथा जल संरक्षण ;उज्जैन नगर तथा षिप्रा नदी के विषेष सन्दर्भ में

आर्थिक विकास करना मनुष्य ने सदा से चाहा है। यह भी तथ्य है कि स्वच्छ पर्यावरण के बिना मनुष्य का जीवन अकल्पनीय है। मनुष्य और पर्यावरण के इस रिष्ते में किसी भी हिस्से को बड़ी चोट न केवल इस रिष्ते को खतरे में डाल देती है बल्कि दोनों के अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाते हैं। पर्यावरण बिगड़ेगा तो मानव जीवन प्रभावित होगा। इसका यह अर्थ नहीं है कि आर्थिक विकास की कीमत पर पर्यावरण बचायें या पर्यावरण की कीमत पर...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3241
View Resource जैवविविधता एवंसंरक्षण

पृथ्वीअपनेमेंअसीमसंभावनाएं एकत्रित कियेहुए है । प्रकृति के अनेकानेकविविधताओं की कल्पनाकरहीइसबातका पता लगायाजासकताहैकिसंभावनाएंपक्ष की है या विपक्ष की तात्पर्यपृथ्वीपरअथाहकृषिभूमि, जल वृक्ष, जीव-जन्तुतथा खाद्य पदार्थथे, परन्तुमानव के अनियंत्रित उपभोग के कारण ये सीमितहोगयेहै । परवास्तवमेंहमअपनेप्रयासों से इनसंपदाओंकाउचितप्रबंध करइसेभविष्य के लिए उपयोगीबनासकतेहै...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3243
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