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Granthaalayah: Open Access Research Database
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View Resource जलवायु परिवर्तन और भारतीय कृषि

भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारशिला कृषि है। कृषि एवं जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव कमजोर कृषक पर पड़ रहा है। वर्षा की मात्रा में परिवर्तन होने से फसलों की उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जलवायु में होने वाला परिवर्तन हमारी राष्ट्रीय आय को भी प्रभावित कर रहा है। देश के बहुत से भागों में अल्प वर्षा से फसलें सूख जाती है या अति-वृष्टि से बह जाती है जिससे न केवल खाद्यानों का...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3277
View Resource पर्यावरण प्रबन्धन एवं समाज

मानव और पर्यावरण का निकट का सम्बन्ध है। पर्यावरण मानव को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। स्वावलम्बी विकास की अवधारणा पर्यावरण एवं विकास नीतियों के एकीकृत नजरिये पर आधारित है जिनका अभिप्राय किसी पारिस्थितिक क्षेत्र से अधिकाधिक आर्थिक लाभ लेना एवं पर्यावरण के संकट एवं जोखिम को न्यूनतम करना है। इसमें अन्तर्निहित है, वर्तमान की आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं को भविष्य की क्षमताओं से समझौता...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3280
View Resource CERTAIN CRITICAL OBSERVATIONS ON MELANOPHORES AS BIOMARKER OF WATER POLLUTION

Recently, first time in entire cultural history, man has faced one of the most horrible ecological crisis - the problem of pollution of his environment which some time past was pure, virgin, undisturbed, uncontaminated and basically quit hospitable for man. The presence in or introduction into the environment of a substance having harmful or poisonous was felt by man now. Pollution is an...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3281
View Resource प्रदूषण मुक्त नगर नियोजन का उत्कृष्टतम उदाहरण: हड़प्पा सभ्यता

वर्तमान में पर्यावरणीय समस्याओं से सम्पूर्ण विश्व ग्रस्त है। ये समस्यायें प्रदूषण के रूप में सर्वत्र दिखाई देती हैं। हमारे पर्यावरण अथवा जीवमण्डल के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों के ऊपर जो हानिकारक प्रभाव पड़ता है, प्रदूषण कहलाता है। कुछ दशकों से प्राकृतिक जलवायु में विस्मयकारी परिवर्तन होने लगे हैं जैसे जहाँ सूखा होता था वहाँ बाढ़ आने लगी है। अतिवृष्टि वाले क्षेत्र सूखाग्रस्त होने लगे हैं। धरती...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3283
View Resource पर्यावरण संरक्षण और अन्तर्राष्ट्रीय कानून

हमारे आस पास के वातावरण जिसमें हम जिव-जन्तु समस्त प्रकृति पेड़ पौधों से मिलकर पर्यावरण बनता है और इसके बिना हम जिवन की कोई कल्पना नही कर सकते है हमारे समक्ष आज पर्यावरण को सुरक्षित रखना बहुत बड़ी चुनौती है, इस हेतु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर और विधियों के उल्लंघन होने पर समय-समय पर सजग प्रहरी के रूप में माननीय उच्चतम न्यायालय ने निर्णय भी दिये हम हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस भी बनाते है।

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i9SE.2015.3284
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