मानव और पर्यावरण का निकट का सम्बन्ध है। पर्यावरण मानव को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। स्वावलम्बी विकास की अवधारणा पर्यावरण एवं विकास नीतियों के एकीकृत नजरिये पर आधारित है जिनका अभिप्राय किसी पारिस्थितिक क्षेत्र से अधिकाधिक आर्थिक लाभ लेना एवं पर्यावरण के संकट एवं जोखिम को न्यूनतम करना है। इसमें अन्तर्निहित है, वर्तमान की आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं को भविष्य की क्षमताओं से समझौता किये बिना पूरा करना। इसको प्राप्त करने के लिये हमें विकास का पारिस्थितिक समन्वय करना होगा जिसमें हमें अपनी प्राथमिकताओं का पुनर्निन्यास करना चाहिये तथा एक आयामी प्रतिमान छोड़ देना चाहिये जो कि वृद्धि को कतिपय सीमित दृष्टिकोंण से देखता है, जिसमें व्यक्ति के बजाय वस्तुओं को उच्चतर स्थान दिया जाता है जिसने हमारे सुख की बजाय हमारी आवश्यकताओं में वृद्धि कर दी है।
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