साहित्य और चित्रकला का पारस्परिक घनिष्ठ अंतर्सबंध है। दोनो के माध्यम से जीवन के गहन उद्देष्यों की पूर्ति होती है। साहित्यकार के शब्द यदि हमारी भावना को उद्वेलित कर सकते हैं तो चित्रकार की तूलिका से अंकित रेखाएं और रंग भी हमारे हृदय के कोमल पक्ष को छूने की अद्भुत शक्ति लिए होते हैं। कवि और चित्रकार दोनो ही अपनी कला प्रतिभा के जरिये सौंदर्य रचना करते हैं। कविता में शब्दों का तथा चित्रों में रंग और रेखाओं का सौंदर्य मौजूद रहता है।1 एक कुषल चित्रकार की भाँति साहित्यकार भी शब्दों के माध्यम से सुंदर बिंब एवं रंग संयोजन प्रस्तुत करता है।
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