व्यक्ति को सदा से ही अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आय के उचित साधनों की तलाश रहती है। यही कारण है कि ग्रामीण व्यक्तियों ने जब शहरों की ओर पलायन किया तो नगरों का विस्तार होने लगा। परिणाम स्वरूप पूर्व में जो नगर व्यवस्थित रूप से बसे हुऐ थे वहीं वे नगर आधुनिक समय में अव्यवस्थित रूप में बस कर अव्यवस्थित महानगरों का रूप लेने लगे। नगरों एवं महानगरों की इसी अव्यवस्था ने हमारे समक्ष प्रदूषण की समस्या खड़ी कर दी है। जो नगर सभ्यता व संस्कृति के केन्द्र माने जाते हैं अब वही नगर प्रदूषण के केन्द्र बन गये है।
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