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Granthaalayah: Open Access Research Database
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Colour

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View Resource चित्रकार-साजन कुरियन मैथ्यू के चित्रों का रंग संयोजन

इस व्रम्हंाण में हम अपनी आॅखों से जो भी देखते है। उनमें सबसे पहले रंग का प्रभाव पड़ता है। सृष्टी में अनेक प्रकार के रंग पाये जाते है, जिनमें से अधिकांष रंग ऐसे होते है। जिन्हें आम आदमी आसानी से पहचान सकता है जैसे लाल, पीला, नीला, हरा, बैंगनी, काला, लेकिन इनके अलावा कुछ रंग ऐसे पाये जाते है। जिन्हें आम आदमी आसानी से नहीं पहचान सकता, जिन रंगों को आसानी से नही पहचाना जा सकता है। उन रंगों को आम आदमी...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v2.i3SE.2014.3584
View Resource रंगों का समाज पर प्रभाव - ”होली समता का उत्सव“

होली भले ही साल-दर-साल आती रहे, पर उसके इंतजार की बेकरारी दिलों में कभी कम नहीं होती। रंगों में सराबोर हो उठने का यह त्यौहार प्राचीन काल से ही हमारा गौरव पर्व है। होली की रंगत ही कुछ ऐसी है कि इसने पंथों, संप्रदायों के बाड़ भी प्रेम की बौछार करते हुए बड़े खिलंदड़पन के साथ तोड़े है। यायावर अलबरूनी पर होली के रंग ऐसे चढ़े कि उसने अपनी ऐतिहासिक यात्रा के संस्मरण में होलिकोत्सव का खास जिक्र किया। मुस्लिम...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v2.i3SE.2014.3586
View Resource “भारत में ग्राफिक्स कला में रंगों का उपयोग”

भारत में अत्यधिक मात्रा में छापाचित्रों का निर्माण किया गया और अनेकों कलाकारों जिनमें विलियम और डेनियल ने छापा कला की भारत में संभावनाओं को टटोला और दोनों कलाकारों ने 1786-88 के मध्य ‘ कलकत्ता के बारह दृश्य’ नामक मूल अम्लांकन रंगीन छापाचित्रों का निर्माण किया जिनमें चित्रों को एक रंग में छापा गया और उनको रंगीन स्याही से रंगदार बनाया गया। ;9द्ध छापाकला की इस गतिविधि के बाद देश में अनेकों जगह रंगीन...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v2.i3SE.2014.3589
View Resource रंगो का सामाजिक परिप्रेक्ष्य

रंग आनंद एवं उत्साह का प्रतीक है। रंगों का मानव मस्तिष्क पर विशेष प्रभाव पड़ता है। रंग किसी भी वस्तु में आकर्षकता एवं वोधगम्यता उत्पन्न करते है। रंग की प्राप्ति का स्त्रोत प्रकाश है। विभिन्न रंगो की पहचान इसीलिए संभव होती है क्योंकि वस्तुएं प्रकाश को परावर्तित यो अभिशोषित करती है। प्रकाश आंखो में प्रवेश करता है। हमारी दृष्टि संवेदना पर क्रिया करता है। इसके कारण प्रकाश की संवेदना उत्पन्न होती है और...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v2.i3SE.2014.3590
View Resource चित्रकला में रंग - प्रागैतिहासिक काल मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ में

चित्रकला को अभिव्यक्तिगत सार्मथ्य प्रदान करने वाले तत्वों में रंग प्रमुख है। चित्रकला में रंग की अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका है। चित्रकार जिस आधारभूत सतह पर चित्रांकन करता है उसमें रंग उसकी पर्याप्त सहायता करते हैं इन्हीं के आधार पर कलाकृति मानसिक सन्तुष्टि प्रदान करती है। रंग का आधार पाकर बनाई गई रचना अपने अभिष्ट को पाने में समर्थ होती है। रंग के माध्यम से चित्रकार अपनी कृति को कोमल बनाता है।...

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v2.i3SE.2014.3592
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