Original Article
Round Theory
गोल
सिद्धांत
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Dr. Sudhir
Kumar Chhari 1* 1 Assistant Professor of
Painting, Government Maharani Laxmi Bai Girls' College, Indore, India |
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ABSTRACT |
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English: The fundamental basis of the concept *Satyam Shivam Sundaram* (Truth, Goodness, and Beauty) is the Circle Principle. It offers a 100 percent remedy for *Vastu Dosha* (architectural defects). I began formulating and propounding the Circle Principle sometime after the year 2007. This concept first emerged in my mind in 2007, when I discovered some of the world's most ancient rock paintings and caves in the Chhatarpur district. I conducted an in-depth study of these paintings, which serve as tangible evidence of the trajectory of human evolution. Even today, we can observe and comprehend them through both ordinary and scientific lenses. I made these significant discoveries the central theme of my Ph.D. research. During the course of my research, I undertook an archaeological and artistic analysis of various facets and aspects of these rock paintings; concurrently, I also studied rock art from across the entire globe. Hindi: सत्यम
शिवम सुंदरम
का मूल आधार
गोल
सिद्धांत है।
को वास्तु
दोष से 100
प्रतिशत
मुक्ति दिला
सकता है। गोल
सिद्धांत का
प्रतिपादन
मैंने सन 2007 के
पश्चात करना
प्रारंभ कर
दिया था। यह
विचार मेरे
मस्तिष्क
में तब आया जब
मैंने 2007 में
विश्व के
सर्वाधिक
प्राचीन शैल
चित्र एवं
गुफाओं को
छतरपुर जिले
में खोजा था।
चित्रों पर
गहन अध्ययन
किया, जो
कि मानवीय
विकास
क्रम को
प्रमाणित करते
हैं। आज भी हम
साधारण
तरीके एवं
वैज्ञानिक
तरीके से
इन्हें देख
भी सकते हैं।
और समझ भी
सकते हैं।
अपनी
महत्वपूर्ण खोजों
को मैंने
अपने शोध पी.एच.डी.
का मुख्य
विषय बनाया
था। शोध के
दौरान शैल
चित्रों के
विभिन्न
पक्षों एवं
पहलुओं का पुरातात्विक
एवं कलात्मक
विश्लेषण
किया। साथ ही
संपूर्ण
विश्व के शैल
चित्रों का
भी अध्ययन
किया। Keywords: Circle Principle, Satyam Shivam Sundaram, Vastu Dosha, Rock Paintings, Chhatarpur, Human
Evolution, वृत्त
सिद्धांत, सत्यम
शिवम सुंदरम, वास्तु
दोष,
शैल
चित्र,
छतरपुर, मानव
विकास |
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प्रस्तावना
सत्यम
शिवम सुंदरम
का मूल आधार
गोल सिद्धांत है।
को वास्तु दोष
से 100 प्रतिशत
मुक्ति दिला
सकता है। गोल
सिद्धांत का
प्रतिपादन
मैंने सन 2007 के
पश्चात करना
प्रारंभ कर
दिया था। यह
विचार मेरे
मस्तिष्क में
तब आया जब
मैंने 2007 में
विश्व के
सर्वाधिक
प्राचीन शैल
चित्र एवं
गुफाओं को
छतरपुर जिले
में खोजा था।
चित्रों पर
गहन अध्ययन
किया, जो कि
मानवीय
विकास
क्रम को
प्रमाणित करते
हैं। आज भी हम
साधारण तरीके
एवं वैज्ञानिक
तरीके से
इन्हें देख भी
सकते हैं। और
समझ भी सकते
हैं। अपनी
महत्वपूर्ण खोजों
को मैंने अपने
शोध पी.एच.डी.
का मुख्य विषय
बनाया था। शोध
के दौरान शैल
चित्रों के
विभिन्न
पक्षों एवं
पहलुओं का
पुरातात्विक
एवं कलात्मक
विश्लेषण
किया। साथ ही संपूर्ण
विश्व के शैल
चित्रों का भी
अध्ययन किया।
मानवीय
विकास के
सर्वाधिक
प्राचीन
प्रमाण शैल
चित्र ही हैं।
विश्व के
समस्त शैल
चित्रों का
निर्माण 80,000 वर्ष ई.
पूर्व से 5000 ईसा
पूर्व तक मध्य
पाषाण काल एवं
आधुनिक पाषाण
काल तक माना
जाता है। मध्य
प्रदेश के
छतरपुर जिले
में मैंने 2007 से 2021 तक 3000 से अधिक
प्रागैतिहासिक
पाषाण कालीन
गुफाओं को
निरंतर खोजा
था। छतरपुर
जिले के शैल
चित्रों का
समय लग 40,000 बीसी से 10 हजार ईसा
पूर्व तक माना
जाता है। जो
कि भारत ही
नहीं विश्व के
सर्वाधिक
प्राचीन शैल
चित्र है। शोध
के दौरान
विश्व कला
संस्कृति एवं
सौंदर्य का भी
मैंने अध्ययन
किया।
तत्पश्चात एक नवीन
विचार का
मस्तिष्क में
प्रस्फुटन
हुआ। सौंदर्य
का मूल आधार
गोल आकार ही
है। मानव हमेशा
गोल आकार के
प्रति
आकर्षित होता
रहा है। जिसका
प्रमाण पाषाण
कालीन मानव ने
पहली वार किसी
जानवर का
शिकार करने के
लिए नदी के
किनारे पड़े
गोल पत्थर को
उठाकर प्रयोग
किया।
इसके
अतिरिक्त
आदिमानव ने
चक्के व्हील
का भी आविष्कार
गोल सिद्धांत
पर आधारित
होने के कारण
किया था।
समकालीन
आदिमानव दे जब
पहली बार किसी
विशाल शिला
खंड को किसी
ऊंची पहाड़ी से
नीचे गहरी खाई
में लुढ़कते
हुए गिरते
देखा होगा। उसी
दौरान उसके
मस्तिष्क में
अनेक विचार
आने लगे होंगे,
जैसे किसी
भारी पत्थर या
अन्य वस्तु को
एक स्थान से
दूसरे स्थान
पर ले जाना
काफी दुष्कर
या कठिन होता
है,
लेकिन
पत्थर या किसी
वस्तु को
उठाने के बजाय
उसे लुढ़का कर
ले जाना काफी
सरल या सुगम
होता है। इसी
तकनीकी से
मानव ने भारी
पत्थरों या
पेड़ों के तनों
को गोला कार
का बनाकर एक
स्थान से
दूसरे स्थान
पर आसानी से
ले जाया करता
था। इसके बाद
किसी गोल आकार
के
लकड़ी अथवा
पत्थर के बीच
में छेद करके
उसके बीच में
लकड़ी डालकर दो
पहिया वाहन
बनाया होगा ,जैसे रथ,
बैलगाड़ी
अथवा अन्य
वाहनों का
आविष्कार कर
लिया होगा।
तत्पश्चात
चार पहिया या
इससे अधिक पहियों
को जोड़कर भारी
वाहन जैसे रेल,
ट्रक,
बस
इत्यादि बनाए
हैं। इन सबके
निर्माण का आधार
गोल ही है।
यही गोल
सिद्धांत है।



संपूर्ण
ब्रह्मांड
में अनगिनत
तारे एवं असंख्य
आकाश गंगाए
हैं। सभी अपने
आप वर्षों से
निरंतर
गतिमान तथा
संचालित हैं।
वैज्ञानिकों एवं
भौतिक
शास्त्रीयों
ने इनके
निर्माण ,संचालन,
गति ,आयु एवं
दूरी के सटीक
आंकड़े
प्रस्तुत
किए। वैज्ञानिकों
का मानना है
कि एक विशाल
विस्फोट से
ब्रहमांड का
निर्माण हुआ
था। जिसे बिग
बैंग कहा जाता
है। खगोल
शास्त्र एवं
वैज्ञानिक इसे
बिग बैंग की
घटना मांगते
हैं। एक
विस्फोट से
ऊर्जा एवं
पदार्थ से
ब्रहमांड का
निर्माण हुआ।
ब्रहमांड गोल
एवं क्रिया
शील है।
ब्रहमांड में
मौजूद तारे और
आकाश गंगाए एक
दूसरे से
परस्पर दूर जा
रही हैं।
वैज्ञानिकों
एवं खगोल
शास्त्रियों
ने इनका रंग,
रूप, आकार दूरी,
आयु एवं
मटेरियल तक की
गणना कर ली
है। वैज्ञानिकों
के अनुसार एवं
आम जनमानस ने
स्वयं के अनुभव
एवं ज्ञान के
आधार पर
ब्रह्मांड
में सभी ग्रहों
तारों को
गोलाकार रूप
में देखा है,
जैसे हम
खुली आंखों से
सूरज चंद्रमा
एवं अनेक तारों
को रात्रि में
देख सकते हैं।
सेटेलाइट कैमरे
एवं नवीन
तकनीकी के
माध्यम से
इनका गहराई से
अध्ययन किया
जा सकता है।
सूर्य
,पृथ्वी,
मंगल,
चंद्रमा
गोल है।
प्रथ्वी
पर समंदर,
नदियां ,झरने,
पेड़ पहाड़
गोल है।
जीव
जंतु के शरीर,
हड्डियां ,कोशिकाएं,
अंग
प्रत्यंग गोल
हैं।
गुफाएं,
झोपड़ियां,
पक्षियों
के घोसले,दीमक,चींटियों
के
संपूर्ण
ब्रह्मांड के
साथ जीवन के
संचालन में
निरंतरता गोल
आकार के कारण
ही संभव है।
यह किसी अन्य
आकार से संभव
नहीं होता।
परंतु आधुनिक
तकनीकी ने सब
कुछ असंतुलित
सा कर दिया
है। हमने
प्रकृति के
नियम में अमूल
चूक परिवर्तन कर
दिया है। यह
सच है कि मानव
ने अपनी
आवश्यकताओं
को ध्यान में
रखकर वस्तुओं
का सृजन किया
है। मानव ने
विकास की तेज
दौड़ के कारण
बहुत बड़ी गलती
कर दी है।
मानव यह भूल
गया है की


उसने
ब्रह्मांड के
संचालन के
नियम गोल
सिद्धांत,
राउंड
थ्योरी के
खिलाफ
व्यवहार किया
है। इसको अगर
मैं सीधा
उदाहरण देकर
समझा अनुकूल
होती है। मानव
ने विकास की
तेज दौड़ के
कारण बहुत बड़ी
गलती कर दी
है। मानव यह
भूल गया है की
उसने ब्रह्मांड
के संचालन के
नियम गोल
सिद्धांत,
राउंड
थ्योरी के
खिलाफ
व्यवहार किया
है। इसको अगर
मैं सीधा
उदाहरण देकर
समझा सकता हूं,
जैसे
पहाड़ों को
चैकोर अथवा
किसी अन्य
आकार का बना
दिया जाए,
नदियों को
चैकोर बना
दिया जाए,
घौंसले
डब्बे जैसे
बना दिए जाए,
वाद्य
यंत्रों को
अन्य आकार में
बनाए जाए,
पानी की
टंकियां
बंदूक की
नालियां, मिसाइल
आदि के आकार
बदल दिए जाएं,
तो क्या
वह भली भांति
अपना कार्य कर
सकेंगे। इसके
परिणाम बहुत
खतरनाक हो
सकते हैं।
नई
तकनीकियों ने
मानव के सबसे
महत्वपूर्ण
रहने के
स्थानों घर,
ऑफिस,
होटल जहां
वह अपना
अधिकतम समय
व्यतीत करता
है,
वे सब
स्थान
वर्गाकार
अथवा चैकोर
आकार के होने
के कारण
प्राकृतिक
वास्तु दोष के
कारण सब कुछ
असंतुलित हो
गया है, जैसे
वर्गाकार एवं
चैकोर भवन,
घर, दरवाजे ,खिड़कियां
आदि सब
वस्तुएं
चैकोर एवं
वर्गाकार
होने के कारण
इनमें शुद्ध
हवा, प्रकाश
एवं ध्वनि के
गमन में अवरोध
होता है। हमें
एहसास ही नहीं
होता कि हम
कितनी बड़ी
समस्याओं से
ग्रसित हैं।
निरंतर वायु
एवं प्रकाश के
अवरुद्ध होने
के कारण भवन
में अनेक
प्रकार के खतरनाक
बैक्टीरिया
एवं वायरस
पैदा हो जाते
हैं, जिसके
कारण हम अनेक
बीमारियों से
ग्रसित हो जाते
हैं। हम अक्सर
देखते हैं की
घरों के कोनों
में मकड़ियों
के जाल, अनेक
प्रकार का
कचरा कोने में
ही एकत्रित
होता है। यह
बीमारियों
को आमंत्रण
देता है। धूल,
मिट्टी
आदि के कारण
त्वचा रोग,
श्वास रोग
एवं
एलर्जी के
अनेक रोग पैदा
हो जाते हैं।
ध्वनि के सही
प्रवाह न होने
से कम या
ज्यादा सुनाई
देना, कर्कश
ध्वनि से मन
अशांत एवं
चिड़चिड़ा होने
लगता है। इसका
ज्यादा असर
बच्चों, बुजुर्गों
एवं बीमार
व्यक्तियों
के मानसिक स्वास्थ्य
पर पड़ता है।
इन सभी
समस्याओं का
एक ही निराकरण
है। हमारे
रहने के स्थान
को हमने
प्राकृतिक
गोल सिद्धांत
राउंड थ्योरी
के द्वारा
निर्मित नहीं
किए हैं।
प्राकृतिक
गोल सिद्धांत
या राउंड थ्योरी
क्या है? यह
सिद्धांत
जैसा कि मैंने
पूर्व में
जिक्र किया है,संपूर्ण
प्रकृति का
सृजन गोल
सिद्धांत पर
आधारित है। यह
सिद्धांत
ब्रह्मांड के
निर्माण से
लेकर पृथ्वी,
सूरज,
मंगल,
चंद्रमा,
समंदर,
नदियां,
पेड़ पौधे,
जीव जंतु,
जीवों के
अंडे, फूल पत्ते
आदि सभी का
सृजन
प्राकृतिक
गोल सिद्धांत
के आधार पर
है। इस
सिद्धांत के
अंतर्गत सृजन
प्रक्रिया
स्वत होती है।
प्राकृतिक
होती है।
साधारणतः
मानव इस
प्रक्रिया को
ईश्वर जनित भी
कहता है। वह
समस्त
ब्रह्मांड
एवं प्रकृति
का संचालक
ईश्वर ही को
मानता है।
जबकि विज्ञान
ऐसा नहीं
मानता।
विज्ञान अपने
शोधों के
आंकड़ों एवं
विश्लेषण से
इनके सृजन एवं
संचालन का
लगभग
निष्कर्ष निकाल
लेता है ।
आधुनिक
मानव को छोड़कर
सभी जीव जंतु,
पशु
पक्षियों के
घरों पर
प्रकाश डाले
तो हम समझ
सकते हैं कि
जीव जंतुओं
एवं पशु
पक्षियों ने
प्राकृतिक
गोल सिद्धांत
के तहत अपने
रहने के स्थान
अथवा घरों का
सृजन किया है।
जैसे चीटियां
दीमकों
के घरौंदे ,चूहों के
बिल, लोमड़ी,
सेही
सियार आदि की
गुफाएं, पक्षियों
के घोसले,
बया पक्षी
के सुंदर
घौंसले को कौन
नहीं जानता ।
पाषाण
कालीन आदि
मानव ने भी
प्रारंभ में
हजारों लाखों
वर्षों तक
प्राकृतिक
गोल सिद्धांत का
पालन किया था।
आदिम मनुष्य
ने प्रारंभ
में प्राकृतिक
गुफाओं को
अपना निवास
स्थान बनाया
था। जिसका
उदाहरण भीम
बैठका की
गुफाएं, मोना सैया,
जटाशंकर ,अम्मापानी
की गुफाएं
छतरपुर मध्य
प्रदेश में
स्थित है।
आदिम मनुष्य
गुफाओं से
निकलकर स्वयं
निर्मित
मिट्टी के
घरों, झोपड़ियां
बनाकर रहने
लगा। सिंधु
घाटी की सभ्यता
तक आते-आते
मनुष्य ने
काफी हद तक
वस्तु
सृजन के
तकनीकी रूपों
को परिवर्तित
कर लिया था।
लेकिन फिर भी
मनुष्य
प्राकृतिक गोल
सिद्धांत के
आधार पर
ऐतिहासिक
संरचनाओं को
आकार देता रहा
है,
जैसे अशोक
कालीन स्तंभ,
सांची
बोधगया के
संपूर्ण
ब्रह्मांड के
साथ जीवन के
संचालन में
निरंतरता गोला
आकार के कारण
ही संभव है।
यह किसी अन्य
आकार से संभव
नहीं होता।
परंतु आधुनिक
तकनीकी ने सब
कुछ असंतुलित
सा कर दिया
है।
सत्यम
शिवम सुंदरम
का मूल आधार
गोल सिद्धांत है
।
महान
स्तूप आदि इसी
गोल सिद्धांत
पर निर्मित किए
गए हैं ।
सत्यम
शिवम सुंदरम
का मूल आधार
गोल सिद्धांत है।
जो
सुंदर है,
वह
शाश्वत!
मेरे
द्वारा
स्थापित
प्राकृतिक
गोल सिद्धांत
राउंड थ्योरी
के माध्यम से
मैं यह कहना
चाहता हूं कि
हम जहां अपना
अधिकतम समय
व्यतीत करते
हैं, जैसे
घर,
ऑफिस होटल,
स्कूल एवं
कॉलेज आदि वहां
कुछ हद तक हम आंतरिक
सज्जा अथवा
कुछ कलात्मक
गोल सिद्धांत
का पालन कर
सकते हैं।
पूर्व में बने
घरों में
परिवर्तन
करना आसान
नहीं होगा,
यह भी
मानता हूं आज
के निर्मित
भवनों में
परिवर्तन
करना उतना सरल
नहीं है। बहुत
अधिक तोड़-फोड़,
धन एवं
समय की
बर्बादी भी
होगी। लेकिन
कुछ कलात्मक
परिवर्तन से
कुछ हद तक
वास्तु दोष को
ठीक किया जा
सकता है। मैं
यह दावा कर
सकता हूंॅ।
मेरे द्वारा
की गई आंतरिक
सज्जा से घर,
ऑफिस एवं
होटल के
वास्तु दोष से
100 प्रतिशत
निजात पाने
में सफल
होंगे। इस
कलात्मक
परिवर्तनों
एवं आंतरिक
सज्जा का
प्रभाव हम कुछ
ही दिनों में
महसूस कर सकते
एवं देख सकते
हैं।
प्राकृतिक
गोल सिद्धांत
अपनाओ !!
सुखी,
समृद्ध
एवं स्वस्थ
जीवन पाओ !!
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