Original
Article
Indian art and culture
भारतीय
कला और
संस्कृति
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1 Professor, Sociology, Government
Maharani Lakshmibai Kanya, Graduation College, Kila
Bhawan, Indore, India |
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ABSTRACT |
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English: India's true identity lies in its diverse culture. Over thousands of years of historical journey, India has assimilated diverse civilizations, religions, languages, and outlooks on life, developing a multifaceted cultural landscape. Indian art and culture are among the world's most ancient, rich, and continuously evolving traditions. Hindi: भारत
देश की असली
पहचान उसकी
विविध
संस्कृति
है। हजारो
वर्षो की
ऐतिहासिक
यात्रा में
भारत में विविध
सभ्यताओ, धर्म,
भाषाओं
और जीवन
दृष्टियों
को आत्मसात
करते हुये एक
बहुरंगी
सांस्कृतिक
स्वरूप
विकसित किया
है। भारतीय
कला ओर
संस्कृति विश्व
की सबसे
प्राचीन
समृद्ध और
निरन्तर
विकसित होती
परम्पराओं
में से एक है। Keywords: Art, Culture, Technology, Unity in
Diversity, कला, संस्कृति, तकनीकी, अनेकता
में एकता |
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प्रस्तावना
भारत देश की असली
पहचान उसकी
विविध
संस्कृति है।
हजारो वर्षो
की ऐतिहासिक
यात्रा में
भारत में विविध
सभ्यताओ, धर्म, भाषाओं
और जीवन
दृष्टियों को
आत्मसात करते
हुये एक
बहुरंगी
सांस्कृतिक
स्वरूप
विकसित किया
है। भारतीय
कला ओर
संस्कृति
विष्व की सबसे
प्राचीन
समृद्ध और
निरन्तर
विकसित होती
परम्पराओं
में से एक है।
भारतीय
संस्कृति का
अर्थ -
संस्कारो का
विकास। किसी
समाज या समूह
के सांझा
मूल्यों, विश्वासों, ज्ञान, परम्पराओं, कला, रीति रिवाजो
और जीवन शेली
का वह स्वरूप
हैं जो उन्हें
एक साथ जोडता
हैं और उसकी
पहचान बनता
है। भारतीय
संस्कृति मानव
जीवन को शारीरिक, मानसिक, नैतिक और
आध्यात्मिक
स्तर पर
परिष्कृत
करने का
प्रयास करती
है। सत्य, अंहिसा, करूणा, सहिष्णुता, त्याग और
समन्वय
भारतीय
संस्कृति के
मूल स्तम्भ
है। “वसुधैव
कुटुम्बकम”
की भावना भारत
की वैश्विक
दृष्टिको दर्शाती
हैं जिसने
सम्पूर्ण
विश्व को एक
परिवार माना गया
हैं।
कला
मानवीय
रचनात्मकता
कौशल और
कल्पना की अभिव्यक्ति
हैं जो
भावनाओं
विचारों और
सौन्दर्य को
व्यक्त करने
के लिये
चित्रकला, संगीत, नृत्य, साहित्य, मूर्तिकला
जैसे विभिन्न
माध्यमों का
उपयोग करती
है।
भारतीय
कला की जडे
सिंधु घाटी
सभ्यता से
जुडी हैं।
मोहनजोदेड़ो, हडप्पा से
प्राप्त
मोहरे
मूर्तियों, खिलौने और
नगर योजना, कला बोध
और तकनीकी
दक्षता का
प्रमाण है।
वैदिक काल में
भारतीय
संस्कृति का
आधार धर्म
दर्शन बना ।
इस युग में
कला मुख्यतः
मौखिक
परम्परा के
रूप में
विकसित हुई।
इस काल में
यज्ञ मंत्र
संगीत और
अनुष्ठान
होते थे।
सामवेद को
संगीत का आधार
माना जाता था।
इस काल में
मौखिक परम्परा
का महत्व था
जिसने
साहित्य कला
को समृद्ध
किया। मौर्य
काल में कला
और
संस्कृत्ति
को राजकीय
संरक्षण
प्राप्त हुआ।
सम्राट अशोक
के शासन काल
में बौध धर्म
के प्रसार के
साथ-साथ कला
में नयी चेतना
आयी । गुप्त
काल को भारतीय
कला और संस्कृति
का स्वर्ण काल
युग कहा जाता
है। प्रारम्भिक
मध्यकाल में
मंदिर
स्थापत्य कला
का अभूतपूर्व
विकास हुआ।
मध्यकाल में
इस्लामी संस्कृति
के सम्पर्क
में भारतीय
कला में नया मिश्रण
दिखाई दिया।
प्राचीन
भारतीय समाज
में लोक कलाएँ, चित्र एवं
चित्रकारी, वस्तु एव
शिल्प कलाएँ
संस्कृत्ति
की वाहक होती
थी। भाषा एवं
लिपि का ज्ञान
विकसित नहीं
हुआ था। मानव
सभ्यता का
विकास नही हुआ
था तब कला ही
सामाजिक जीवन
एवं संस्कृति
को अभिव्यक्त करती
थी। प्राचीन
भित्तीचित्र
मंदिरों पर उकेरी
गयी
प्रतिमाएँ, समकालीन
सामाजिक जीवन, वेशभूषा
श्रंगार शैली, आभूषण, युद्ध कला, अस्त
शस्त्र
इत्यिादी को
चित्रों के
माध्यम से ही
अभिव्यक्त
किया जाता था।
कला एवं संस्कृति
किसी भी समाज
के मूल्यों, विश्वासों, प्रथाओं
और रचनात्मक
अभिव्यक्ति
का माध्यम
होती है। इसमे
चित्रकला, संगीत, नृत्य, साहित्य
और रीति रिवाज
शामिल है। कला
रचनात्मक
कौशल और
कल्पना की
अभिव्यक्ति
हैं जैसे पेंटिंग, मूर्ति।
जबकि
संस्कृति
जीवन जीने का
तरीका हैं
जैसे भाषा
परम्पराये
इत्यिादी।
कला संस्कृति
का एक हिस्सा
हैं जो इसे
प्रदर्शित
करता है।
लोक
जीवन एवं
संस्कृति का
प्रदर्शन
भिन्न भिन्न
कलाओं के
माध्यम से
होता है। यह
परम्परा प्राचीन
काल से चली आ
रही है।
ब्रिटिश
काल के दौरान
भारतीय कला और
संस्कृति को
कई चुनौतियों
का सामना करना
पड़ा। स्वतन्त्रता
के पश्चात
भारत में कला
और संस्कृति
को संवैधानिक
संरक्षण
मिला। आधुनिक
युग में भारतीय
कला ने
परम्परा और
आधुनिकता का
संतुलन साधा
हैं। अनेक
कलाकारों ने
इसे नयी
दृष्टि दी हैं।
सिनेमा, रंगमंच और
डिजिटल गुला
ने भारतीय
सांस्कृत्तिक
अभिव्यक्ति
को वैश्विक
मेच प्रदान
किया हैं। आज
भारतीय कला
वैश्विक
प्रभावों के
साथ साथ
पारम्परिक
जड़ो से जुडी
हुई हैं।
वैश्वीकरण
के प्रभाव से
भारतीय
संस्कृति अन्तर्राष्ट्रीय
स्तर पर
लोकप्रिय हुई
है। योग, आयुर्वेद, नृत्य और
संगीत
विश्वभर में
अपनाये जा रहे
हैं।
वर्तमान
समय में भी
सांस्कृतिक
विशेषताओ का प्रदर्शन
कला के माध्यम
से होता हैं
किन्तु उसमें
तकनीक का
उपयोग
सम्मिलत हो
गया है। प्राचीन
कलाए व्यक्ति
के स्वयं की
रचनात्मकता
की अभिव्यक्ति
होती थी। कला
संस्कृत्ति
एवं समाज का
अभिन्न अंग
हैं जो
निरन्तर
साथ-साथ चलते
है।
सांस्कृतिक
परिवर्तन की
प्रक्रिया
में कला भी
प्रभावित हुई
है। कला समाज
का प्रतिविम्ब
है जो सामाजिक
विशेषताओं को
दर्शाता है।
भारतीय
कला और
संस्कृति
हजारों
वर्षों से निरन्तर
विकसित होती
रही है।
भारतीय कला
एवं
संस्कृति
केवल
सौन्दर्य या
मनोरंजन तक
सीमित नहीं
रही, बल्कि
यह धर्म, दर्शन, समाज
राजनीति और
जीवन दृष्टि
से गहराई से
जुड़ी है।
भारतीय कला और
संस्कृति समय
के साथ साथ बदलती
रही है, परन्तु इसकी
मूल चेतना आज
भी जीवित हैं।
प्राचीन काल
की
आध्यात्मिकता
मध्यकाल की
भव्यता, औपनिवेशिक
काल की
संघर्षशीलता
और आधुनिक काल
की नवोन्मेषी
प्रवृत्तियाँ, ये सभी
मिलकर भारतीय
संस्कृति को न
केवल भारत की
पहचान बनाती
है बल्कि
विश्व मानवता
की अमूल्य
धरोहर हैं, इसका भी
एहसास कराती
है।
अतः
हम कह सकते
हैं कि भारतीय
कला एवं
संस्कृत्ति
निरन्तर
प्रवाहमान
नदी की भाँति
हैं जो अतीत
की परम्पराओं
को संजोते हुए
वर्तमान और भविष्य
की ओर अग्रसर
हैं। भारतीय
कला केवल देखने
सुनने का विषय
नहीं है, बल्कि जीने
की कला है, यही इसकी
अमरता और
वैश्विक
महत्व का आधार
है।
सिन्धु
घाटी सभ्यता
से लेकर 21वी सदी के
आधुनिक भारत
तक भारतीय कला
और संस्कृति
ने अनेक रुप
धारण किये है, फिर भी
इसनी मूल
आत्मा
विविधता में
एकता अडिग रही
है। इसी वजह
से भारतीय
संस्कृति को
विविधता में
एकता का
उत्कृष्ट
उदाहरण कहा
जाता है। तकनीकी
ज्ञान ने न
केवल भारत की
कला को एक सूत्र
में पिराया है
वरन् विश्व की
अनेक प्रसिद्ध
कला एवं
संस्कृति को
भी एक साथ
अभिव्यक्त करने
में सहयोग
प्रदान किया
है।
REFERENCES
Agarwal,
G. (2021). Indian
Society and Culture (भारतीय
समाज एवं
संस्कृति). Sahitya Bhawan Publication.
Mahajan,
D. D. K. (2013). Sociology of Tribal Society (जनजातीय
समाज का
समाजशास्त्र). Vivek Prakashan.
Madan,
G. R. (2012). Sociology of Change and Development
(परिवर्तन
एवं विकास का
समाजशास्त्र). Vivek Prakashan.
Gupta, M. L., and Sharma, D. D. (2008). Sociology (समाजशास्त्र). Sahitya Bhawan Publication.
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