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A STUDY OF INSTRUMENT-RELATED ILLUSTRATIONS ON BOOK COVERS BY CONTEMPORARY ARTIST SANDEEP RASHINKAR
समकालीन कलाकार संदीप राशिनकर द्वारा पुस्तक मुख पृष्ठ पर अंकित वाद्य सम्बंधित चित्रांकन का अध्ययन
प्रस्तावना
समकालीन कलाकार संदीप राशिनकर
द्वारा कई चित्र
अंकित किये गए
है, जिनमे
पुस्तक मुख पृष्ठ
चित्रांकन
भी शामिल
है। संदीप
राशिनकर द्वारा पुस्तक मुख पृष्ठ
पर अनेक
विषयों का प्रयोग
कर चित्रांकन
किया गया
है जिनमे
शिक्षा, कार्य, नृत्य,
संगीत, नारी सम्बंधित
एवं अन्य
विषयो पर चित्रांकन
किया गया
है। इसी
प्रकार कलाकार ने संगीत
से सम्बंधित
वाद्य का प्रयोग
कर चित्रांकन
का भी
अति सुन्दर
रूप दर्शाया
है।
समकालीन कलाकार संदीप राशिनकर जी का संक्षिप्त परिचय
कलाकार संदीप राशिनकर
जी इंदौर
के सुविख्यात
कलाकार है। वें
लेखक एवं
समीक्षक भी है।
इन्होने कई अखिल
भारतीय कला प्रदर्शनियों
में चित्रों
का चयन
एवं प्रदर्शन
किया है।
इनके चित्रण
एवं रेखांकन
अनेक साहित्य
एवं पुस्तकों
में प्रदर्शित
किये गए
है। कलाकार
के मुखपृष्ठ
रेखांकन कार्य को
विभिन्न स्तरों पर विशेष
रूप से
सराहा गया है।
पुस्तक मुख पृष्ठ चित्रांकन क्या है?
चित्रांकन, रेखांकन, चित्रकारी,
छायाचित्र
या कला
का अन्य
कार्यो के रूप
में प्रस्तुत
प्रदर्शित
मनःदर्शन
का एक
रूप है,
जिसे ग्राफिक
रूप से
दृश्य प्रस्तुति
देकर ऐन्द्रिक
जानकारी की स्पष्ट
व्याख्या
करने या
निर्धारित
करने के
लिए बनाया
जाना है|
पुस्तक मुख पृष्ठ
एक प्रकार
की कला
है, जिसे
कलाकार किसी पुस्तक
की कहानी,
विषय और
भावनाओं को अपने
चित्रों द्वारा पुस्तक के मुख
पृष्ठ पर दर्शाता
है, जिससे
पाठको का ध्यान
पुस्तक की ओर आकर्षित हो और वे किताब
के भीतर
क व्यंग को स्वयं
महसूस कर सके।
पुस्तक मुख पृष्ठ
किताब की पहचान
कराता है और कलाकार एवं लेखक
के विचारो
को एक
रूप प्रदम
करता है।
वाद्य क्या है?
वाद्य वह उपकरण
है, जो
ध्वनि उत्पन्न करने हेतु
प्रयोग किया जाता
है, विशेष
रूप से
इसका उपयोग
संगीत के लिए
किया जाता
है। यह
शब्द संगीत
के सन्दर्भ
में अधिक
उपयोग किया जाता
है| यह
एक यंत्र
है जिसे
बजाया जा सके।
वाद्य के प्रकार
·
तत वाद्य (तार
वाले वाद्य)-
वीणा, सितार,
सरोद और
वायलिन।
·
सुषिर वाद्य (वायु
वाद्य)- हवा फूंकने
या वायु
के प्रवाह
से बजने
वाले यन्त्र
- बांसुरी, शहनाई, हारमोनियम,
शंख, बीन।
·
अवनद्ध वाद्य (ताल
वाद्य/झिल्ली वाद्य)- चमड़े
या झिल्ली
पर आघात
करने से
बजते हैं.
तबला, ढोल,
नगाड़ा, मृदंग।
·
घन वाद्य (ठोस
वाद्य)- ठोस धातु
या लकड़ी
के आपस
में टकराने
या आघात
से बजते
हैं. मंजीरा,
करताल, खड़ताल, घंट।
मुख पृष्ठ चित्रांकन में वाद्ययंत्रो का प्रयोग
कलाकार संदीप राशिनकर
ने पुस्तक
मुख पृष्ठ
चित्रांकन
में वाद्यों
का बहुत
ही सुन्दर
प्रयोग कर चित्रांकन
किया है।
कलाकार ने अपने
चित्रों में कहीं
सितार दर्शाई है तो कहीं तबले
को अंकित
किया है,
कही बांसुरी
सा प्रदर्शित
होता वृक्ष
है तो
कहीं वीणा
वादन करते
हुए सरस्वती
देवी के
दर्शन होते है।
कलाकार द्वारा आरोही नामक
पुस्तक के मुख
पृष्ठ पर तबला,
हारमोनियम,
सितार जैसे वाद्यों
का प्रयोग
कर चित्रांकन
किया गया
है।
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आरोही - डॉ
शशिकांत म
ताम्बे |
इसी प्रकार साहित्य सागर नामक
पुस्तक के मुख
पृष्ठ पर वीणा
बजाती स्त्री दर्शाई गयी है।
वही सरस्वती
सुमन में
वीणा के
साथ मोर
के पंखो
को दर्शाया
गया है।
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साहित्य सागर
- महिला मंजरी |
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सरस्वती सुमन
- साहित्य
एवं सांस्कृतिक |
कलाकार ने पुस्तक
के शीर्षक
को ही
उस पुस्तक
का चेहरा
देने का
प्रयास किया है।
जैसे वीणा
नामक पुस्तक
के मुख
पृष्ठ पर वीणा
का चित्र
कहीं न कहीं उपस्थित
है। कही
सरस्वती द्वारा वीणा वादन
किया है
तो कहीं
स्त्री द्वारा या मोर
का प्रयोग
कर वीणा
का चित्रण
किया है।
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वीणा |
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वीणा |
कलाकार ने सरस्वती
सुमन नामक
पुस्तक के मुख
पृष्ठ पर बांसुरी
वादन का
चित्रण भी किया
है इस
चित्र को कलाकार
ने एक
वृक्ष की शाखा
को बांसुरी
की तरह
दर्शाया है जिसे
देख कर
ऐसा प्रतीत
होता है
जैसे वृक्ष
का तना
बांसुरी के सामान
है और
उस वृक्ष
की शाखाएं
उस बांसुरी
को बजा
रही हो।
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सरस्वती सुमन
साहित्य एवं संस्कृति
का सारस्वत
अभियान |
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वीणा |
कलाकार ने मुखपृष्ठ
में विभिन्न
माध्यम जैसे जल
रंग, पेस्टल,
पेंसिल एवं एक्रेलिक
का प्रयोग
किया है। उन्होंने
रंगो का
चयन पुस्तक
के विषय
के आधार
पर किया
है जैसे
सरस्वती सुमन के
मुख पृष्ठ
में प्रकृति
के रंगो
को प्रदर्शित
करने के
लिए हरा
एवं उससे
सम्बंधित
रंगो का
उपयोग किया है। कलाकार
ने आकृतियों
का अमूर्त
रूप मुखपृष्ठ
में प्रस्तुत
किया है।
उपसंहार
इस शोधपत्र मे मुखपृष्ट
रेखांकन कला पर
प्रकाश डाला गया
है।
जब भी
किसी पुस्तक
के सन्दर्भ
मे चर्चा
की जाती
है उसमे
मुखपृष्ट
के महत्व
को इतनी
प्राथमिकता
से उल्लेखित
नहीं किया
जाता। यह शोधपत्र
उसी क्षेत्र
पर प्रकाश
डालता है।
किसी पुस्तक का मुखपृष्ट
उस पुस्तक
मे उपस्थित
विषयो का एक प्रतीकात्मक
चित्रीकरण
होता है।
मुखपृष्ट
पाठक के
मन मे
पुस्तक के प्रति
जिज्ञासा
उत्पन्न करता हैं।
आज कल
के आधुनिक
युग मे
मुखपृष्ट
रेखाँकन कला को
सहेजने की आवश्यकता
है। इस
शोधपत्र के माध्यम
से पाठक
वर्ग मुखपृष्ट
की विभिन्न
बारीकियां
जैसे वाद्य
यंत्रो का अमूर्त
चित्रण, रंगो का
सही चयन
एवं पुस्तक
के भावो
का मुखपृष्ट
द्वारा प्रस्तुतीकरण
समझ सकेंगे। यह शोधपत्र इस कला
को प्रलेखित
करने का
एक प्रयास
है। भविष्य
मे इस
कला के
विभिन्न आयामों पर शोध
संभव है।
REFERENCES
Saraswati Suman. (2007, April–June). Literature and Culture (साहित्य
और संस्कृति). Saraswati Suman
Tambe, S. M. (n.d.).
Personal Interview (व्यक्तिगत
साक्षात्कार). Aarohi
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