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MENTAL HEALTH STUDY HABITS AND ACADEMIC PERFORMANCE: NEW CHALLENGES ARISING FROM THE USE OF SOCIAL NETWORKING SITES

MENTAL HEALTH STUDY HABITS AND ACADEMIC PERFORMANCE: NEW CHALLENGES ARISING FROM THE USE OF SOCIAL NETWORKING SITES

मानसिक स्वास्थ्य, अध्ययन आदत एवं शैक्षिक निष्पत्ति, सोशल नेटवर्किंग साइट्स के उपयोग से उत्पन्न नई परिस्थितियां

 

Kusum Lata Tilawat 1, Dr. Neeti Trivedi 2

 

1 Research Scholar, Banasthali Vidyapith, Banasthali, Rajasthan, India

2 Assistant Professor, Banasthali Vidyapith, Banasthali, Rajasthan, India

 

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ABSTRACT

English: In the present era, the form of education is incomplete without technology and the internet. Social networking sites such as Facebook, Instagram, YouTube, WhatsApp, and Snapchat have become an integral part of students' lives. While these platforms have provided new opportunities for education, their excessive use has led to a significant decline in students' mental health, study habits, and academic performance. This research paper analyzes the new challenges arising from the use of social networking sites among students. While these platforms are becoming new sources of learning, they are also challenging study concentration, discipline, and mental stability.

 

Hindi: वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तकनीक और इंटरनेट के बिना अधूरा है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सऐप और स्नैपचैट विद्यार्थियों के जीवन का हिस्सा बन चुके है। इन माध्यमों ने शिक्षा के लिए नये अवसर प्रदान किए है, परन्तु इनके अति-उपयोग से विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, अध्ययन आदतों और शैक्षिक निष्पत्ति में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। यह शोध पत्र विद्यार्थियों में सोशल नेटवर्किंग साइट्स के उपयोग से उत्पन्न नई परिस्थितियों का विश्लेषण करता है। जहाँ एक आरे ये प्लेटफार्म शिक्षण के नवीन स्त्रोत बन रहे है, वहीं दूसरी ओर अध्ययन एकाग्रता, अनुशासन और मानसिक स्थिरता को चुनौती दे रहे हैं।

 

Received 15 July 2024

Accepted 21 August 2024

Published 30 September 2024

DOI 10.29121/granthaalayah.v12.i9.2024.6646  

Funding: This research received no specific grant from any funding agency in the public, commercial, or not-for-profit sectors.

Copyright: © 2024 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.

With the license CC-BY, authors retain the copyright, allowing anyone to download, reuse, re-print, modify, distribute, and/or copy their contribution. The work must be properly attributed to its author.

 

Keywords: Mental Health, Study Habits, Academic Performance, Social Networking Sites, Digital Literacy, मानसिक स्वास्थ्य, अध्ययन आदत, शैक्षिक निष्पत्ति, सोशल नेटवर्किंग साइट्स, डिजिटल साक्षरता।


1.   प्रस्तावना

आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल प्रौद्योगिकी की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गई है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ने षिक्षण की सीमाओं को विस्तारित किया है, परन्तु, इस डिजिटल विस्तार के साथ विद्यार्थियों के व्यवहारिक, मानसिक और शैक्षणिक जीवन में परिवर्तन की तीव्र लहर देखी जा रही है।

आज के विद्यार्थी ‘डिजिटल नेटिव कहलाते है - अर्थात् उनका बचपन और किशारेावस्था तकनीकी माध्यमों में विकसित हुई है।

सोशल नेटवर्किंग साइट्स जैसे कि फसबुके, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, स्नैपचैट, यूट्यूब आदि न केवल मनोरंजन के साधन है बल्कि स्व-प्रस्तुतीकरण, सामाजिक जुड़ाव, और अभिव्यक्ति के मंच बन गए है किन्तु इसी के साथ मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएँ

·        जैसे चिंता, तनाव, एकाकीपन, ध्यान की कमी बढ़ रही है। अध्ययन आदतों, नींद के पैटर्न और शैक्षणिक जीवन को भी गहराई से प्रभावित किया है।

 

 

2.   समस्या विवरण

 यह अध्ययन यह जानने का प्रयास है कि- क्या सोशल नेटवर्किंग साइटस का उपयोग विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, अध्ययन आदत एवं शैक्षिक निष्पत्ति पर प्रभाव डालता है। साथ ही यह भी समझना कि वर्तमान डिजिटल युग में विद्यार्थी किस प्रकार अपने अध्ययन समय, ध्यान और सामाजिक व्यवहार में संतुलन बनाए रखते हैं।

 

3.   अध्ययन की आवश्यकता एवं औचित्य

वर्तमान शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों को ऑनलाइन संसाधनों तक पहुँच के अनेक अवसर प्राप्त हैं। किन्तु, अधिकांश विद्यार्थी इन संसाधनों का उपयोग मनोरंजन या सामाजिक संपर्क के लिए करते हैं न कि अध्ययन हेतु।

सोशल नेटवर्किंग की लत के कारण विद्यार्थी देर रात तक ऑनलाइन रहते है, जिससे उनकी नींद, मानसिक शांति और अध्ययन समय प्रभावित होता है।

 

4.   यह शोध इसलिए आवश्यक है क्योंकि

1)     सोशल मीडिया का प्रभाव उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों पर सबसे अधिक है।

2)     मानसिक स्वास्थ्य और अध्ययन आदतें शैक्षिक उपलब्धि से सीधा संबंध रखती हैं।

3)     अब तक इस विषय पर ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों की तुलना में बहुत कम अध्ययन हुए है।

 

 

5.   साहित्य समीक्षा

Shilpa (2002) ने सोशल नेटवर्किंग साइट्स उपयागे मापन स्केल विकसित कर यह पाया कि अत्यधिक सोशल मीडिया के उपयोग से एकाग्रता में कमी आती हैं। सिंह एवं गुप्ता (2020) ने अपने अध्ययन में सिद्ध किया कि सोशल मीडिया उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य के बीच प्रतिलोम संबंध पाया गया।

Gupta (2018) ने बताया कि सोशल नेटवर्किंग साइटस विद्यार्थियों के अध्ययन समय को कम कर देती है और विलम्ब की आदतों को बढ़ाती है।

Kross et al. (2013) ने पाया कि फेसबुक उपयोग बढ़ने से युवाओं में आत्म-संतुष्टि का स्तर घटता है। 

Sharma (2019) ने बताया कि डिजिटल युग के विद्यार्थी डिजिटल तनाव से गुजर रहे हैं जहाँ वे निरन्तर ऑनलाइन रहकर मानसिक थकान का अनुभव करते हैं।

अनुसंधान पद्धति अनुसंधान विधि अध्ययन वर्णनात्मक सर्वेक्षण पद्धति पर आधारित है। इसके अन्तर्गत जनसंख्या स्वरूप जयपुर जिले के सरकारी एवं निजी माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को लिया गया, जिसमें स्तरीकृत पद्धति से 500 विद्यार्थियों का चयन किया गया। जिसमें 250 बालक व 250 बालिकाएं सम्मिलित की गईं।

 

6.   उपकरण

·        सोशल नेटवर्किंग साइट्स उपयोग मापनी - Shilpa (2002) द्वारा निर्मित।

·        मानसिक स्वास्थ्य - सिंह अरुण और Gupta (2018) की मानसिक स्वास्थ्य मापनी।

·        अध्ययन आदत - शोधार्थी द्वारा स्वनिर्मित प्रष्नावली 50 मदे, पांच वर्गों में विभाजित

·        शैक्षिक निष्पत्ति - विद्यार्थियों के मासिक तथा अर्द्धवार्षिक परीक्षा अंक।

 

7.   परिणाम

परिणामों से ज्ञात हुआ कि:

1)     मानसिक स्वास्थ्य और सोशल नेटवर्किंग साइट्स उपयोग में नकारात्मक सहसंबंध पाया गया। अधिक उपयोग करने वाले विद्यार्थियों में तनाव, बेचैनी और ध्यान की कमी अधिक पाई गई।

2)     अध्ययन आदतें और सोशल नेटवर्किंग साइटस उपयोग में भी नकारात्मक संबंध पाया गया। वे अध्ययन समय का अधिकांश भाग सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर व्यतीत करते हैं और वे नियमित अध्ययन आदतें बनाए नहीं रख पाते।

3)     शैक्षिक निष्पत्ति में सोशल नेटवर्किंग साइटस का अत्यधिक उपयोग एक प्रमुख कारण पाया गया। जो विद्यार्थी प्रतिदिन 1 घंटे से कम सोशल नेटवर्किंग साइटस का प्रयोग करते है, उनका औसत प्रतिशत (72 प्रतिषत) अधिक था, जबकि 5 घंटे से अधिक प्रयोग करने वालों का औसत 58 प्रतिषत पाया गया।

 परिणामों से यह स्पष्ट है कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स का संतुलित उपयोग विद्यार्थियों के लिए लाभकारी हो सकता है किन्तु अत्यधिक उपयोग उनके मानसिक स्वास्थ्य और अध्ययन आदतों को कमजोर बनाता है। इसका कारण यह है कि सोशल नेटवर्किंग साइटस तत्काल संतुष्टि प्रदान करता है, जिससे विद्यार्थी लम्बे समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। अध्ययन के स्थान पर सोशल नेटवर्किंग साइटस में लगे रहना मस्तिष्क के ’’रिवार्ड सिस्टम’’ को प्रभावित करता है- जिससे डोपामिन स्तर असंतुलित हो जाता है और एकाग्रता घटती है। 

इस प्रकार, विद्यार्थियों के भीतर "Digital Burnout" आरै "Academic Anxiety" जैसी स्थितियाँ बढ़ रही है, जो सीधे शैक्षिक उपलब्धि पर असर डालती है।

 

8.   निष्कर्ष

सोशल नेटवर्किंग साइटस ने शिक्षा की दिशा और स्वरूप दोनों बदल दिए हैं। इनके उपयोग ने विद्यार्थियों को वैश्विक ज्ञान से जोड़ा है। परन्तु इसका अनुशासनहीन प्रयोग मानसिक असंतुलन, अध्ययन में अस्थिरता और गिरावट का कारण बन रहा है।

शोध के निष्कर्ष से यह पता चल रहा है कि- सोशल नेटवर्किंग साइटस के उपयोग का संतुलन अत्यंत आवश्यक है। शिक्षकों को विद्यार्थियों में आत्म-अनुशासन विकसित करना चाहिए। साथ ही, बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण एवं सकारात्मक मार्गदर्शन देना चाहिए।

 

9.   सुझाव

1)     वले नेस षिक्षा: विद्यालयों में विद्यार्थियों को डिजिटल जीवन-शैली का संतुलन सिखाने हेतु पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

2)     परामर्श कार्यक्रम: मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए स्कूल काउंसलिंग अनिवार्य की जाए।

3)     षिक्षक प्रषिक्षण: शिक्षको को ‘‘डिजिटल अधिगम और मानसिक स्वास्थ्य’’ के अंतर्संबंध पर प्रशिक्षण दिया जाए।

4)     माता-पिता सहभागिता: अभिभावकों को बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार की निगरानी हेतु जागरूक किया जाए।

5)     स्व नियंत्रण का विकास: विद्यार्थियों में ‘‘सोशल मीडिया डिटॉक्स’’ जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कर आत्म-अनुशासन विकसित किया जाए।

 

CONFLICT OF INTERESTS

None. 

 

ACKNOWLEDGMENTS

None.

 

REFERENCES

Gupta, R. (2018). Impact of Social Media on Study Habits Among Students (विद्यार्थियों की अध्ययन आदतों पर सोशल मीडिया का प्रभाव). Indian Journal of Education, 45(3), 120–130.

Cross, E., Verduyn, P., Demiralp, E., Park, J., Lee, D. S., Lin, N., Shablack, H., Jonides, J., and Ybarra, O. (2013). Facebook use Predicts Declines in Subjective Well-Being in Young Adults (युवा वयस्कों में फेसबुक उपयोग से व्यक्तिपरक कल्याण में गिरावट की भविष्यवाणी). PLOS ONE, 8(8), e69841. https://doi.org/10.1371/journal.pone.0069841

Sharma, V. (2019). Social Media and Mental Health Among Adolescents (किशोरों में सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य). Education and Society, 9(2), 54–61.

Shilpa, S. (2002). Social Networking Sites Usage Scale (सोशल नेटवर्किंग साइट्स उपयोग मापनी). Agra: National Psychological Corporation. (Scale/Manual—journal format not applicable.)

Singh, A., and Gupta, S. (2020). Mental Health Battery (मानसिक स्वास्थ्य बैटरी). Agra: National Psychological Corporation. (Test battery/manual—journal format not applicable.)

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