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A Study of the Impact of Maximum and Minimum Parental Intervention on the Learning Styles of their Children

Original Article

A STUDY OF THE IMPACT OF MAXIMUM AND MINIMUM PARENTAL INTERVENTION ON THE LEARNING STYLES OF THEIR CHILDREN

अभिभावकों के अधिकतम व निम्नतम हस्तक्षेप का उनके बालक-बालिकाओं की अधिगम शैली पर प्रभाव का अध्ययन  

 

Dr. Shaminder Kaur 1*, Madhu Sharma 2

1 Research Supervisor, Nirwan University, Jaipur, Rajasthan, India

2 Research Scholar, Nirwan University, Jaipur, Rajasthan, India  

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ABSTRACT

English: Humans are social beings. They strive for self-improvement within society through their actions and reactions. This improvement can only be achieved when they begin to apply the eternal values ​​of their culture and civilization in their daily lives. In the present era, education is no longer limited to the school; the role of the family and parents in the overall personality development of the child has become extremely important. The extent to which parents intervene in their child's studies, decisions, and behavior directly impacts the child's learning style. The parenting practices adopted by parents influence the child's learning behavior. Differences in the child's learning style can arise depending on the level of parental intervention. This study was conducted to examine this fact and to clarify the relationship between parental intervention and learning style.

 

Hindi: मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह अपनी क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं के द्वारा समाज में स्वयं की उन्नति करना चाहता है। यह उन्नति उसे तभी प्राप्त हो सकती है जबकि वह अपनी संस्कृति एवं सभ्यता के शास्वत मूल्यों को दैनिक जीवन में प्रयोग करना प्रारंभ कर दें।  वर्तमान युग में शिक्षा केवल विद्यालय तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि बालक के सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास में परिवार एवं अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। अभिभावक अपने बालक के अध्ययन, निर्णय एवं व्यवहार में जितना हस्तक्षेप करते हैं, उसी अनुपात में बच्चे की अधिगम शैली (Learning Style) प्रभावित होती है। अभिभावकों द्वारा अपनाई जाने वाली पालन-पोषण संबंधी प्रवृत्तियाँ बालक के अधिगम व्यवहार को प्रभावित करती हैं। अधिक या कम हस्तक्षेप की स्थिति में बालक की सीखने की शैली में अंतर उत्पन्न हो सकता है। इसी तथ्य के परीक्षण हेतु प्रस्तुत अध्ययन का संचालन किया गया है, ताकि अभिभावकीय हस्तक्षेप और अधिगम शैली के मध्य संबंध को स्पष्ट किया जा सके।

Keywords: Parents, Intervention, Boys and Girls, Learning Style, Study, Impact, माता-पिता, हस्तक्षेप, लड़के और लड़कियां, सीखने की शैली, अध्ययन, प्रभाव

 


प्रस्तावना

बालक के व्यक्तित्व विकास में परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। परिवार का वातावरण तथा अभिभावकों का व्यवहार बालक की अधिगम प्रक्रिया को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। अत्यधिक हस्तक्षेप बालक को परनिर्भर बना सकता है, जबकि अत्यल्प हस्तक्षेप से अनुशासन एवं दिशा का अभाव उत्पन्न हो सकता है। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि हस्तक्षेप के स्तर के अनुसार अधिगम शैली में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन किया जाए।

 

अभिभावकीय हस्तक्षेप की संकल्पना

अभिभावकीय हस्तक्षेप का तात्पर्य उस सीमा से है, जिसके अंतर्गत अभिभावक अपने बच्चों के व्यक्तिगत, शैक्षिक एवं सामाजिक जीवन के निर्णयों में भाग लेते हैं। यह हस्तक्षेप दो स्तरों पर देखा जाता है ।

अधिकतम हस्तक्षेप

अधिकतम हस्तक्षेप तब होता है जब माता-पिता बच्चों की जीवनशैली, शिक्षा, मित्रता, करियर चयन और समय-प्रबंधन तक में अत्यधिक नियंत्रण रखते हैं। इसे सामान्यतः Over Protective Parenting भी कहा जाता है।

न्यूनतम हस्तक्षेप

न्यूनतम हस्तक्षेप वह स्थिति है जिसमें अभिभावक बच्चों को स्वतंत्रता प्रदान करते हैं, उन्हें निर्णय लेने देते हैं और केवल मार्गदर्शन करते हैं, बाध्यता नहीं। इसे Supportive Parenting भी कहा जा सकता है। अतः भारत में अभिभावकों का हस्तक्षेप सांस्कृतिक मूल्यों, पारिवारिक संरचना और सामाजिक अपेक्षाओं से जुड़ा हुआ है।

अधिगम शैली

यह सर्वविदित है कि सभी बालक समान ढंग से नहीं सीखते। प्रत्येक बालक की सीखने की प्रक्रिया उसकी मानसिक क्षमताओं, रुचियों, अनुभवों तथा वातावरण पर निर्भर करती है। अधिगम शैली उस विशिष्ट पद्धति को दर्शाती है जिसके माध्यम से व्यक्ति ज्ञान को ग्रहण करता है, समझता है और उसका उपयोग करता है। अधिगम शैली का निर्माण बालक के संज्ञानात्मक, सामाजिक एवं भावनात्मक अनुभवों से होता है। यह शैली कक्षा में सीखने के तरीकों के साथ-साथ दैनिक जीवन के व्यवहार में भी परिलक्षित होती है। विभिन्न शिक्षाविदों के अनुसार अधिगम शैली व्यक्तिगत विशेषताओं का प्रतिबिंब होती है, जो समय के साथ विकसित होती रहती है।

समस्या कथन

वर्तमान अध्ययन की समस्या को विशिष्ट शब्दावली में निम्नवत् रखा गया है- ’’अभिभावकों के अधिकतम व निम्नतम हस्तक्षेप का उनके बालक-बालिकाओं की निर्णय क्षमता तथा अधिगम शैली पर प्रभाव का अध्ययन’’

अध्ययन की आवश्यकता

वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में यह स्वीकार किया गया है कि बालक की अधिगम प्रक्रिया केवल विद्यालय तक सीमित नहीं होती, बल्कि पारिवारिक वातावरण भी इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अभिभावकों के हस्तक्षेप का स्तर बालक के आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता एवं सीखने की शैली को प्रभावित कर सकता है। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि अधिकतम एवं न्यूनतम अभिभावकीय हस्तक्षेप के प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाए।

अध्ययन के उद्देश्यरू

इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि अभिभावकों के अधिकतम एवं न्यूनतम हस्तक्षेप का उनके बालक-बालिकाओं की अधिगम शैली पर क्या प्रभाव पड़ता है।

परिकल्पना

परिकल्पना 01 अधिकतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की अधिगम शैली में कोई सार्थक अंतर नहीं है।

परिकल्पना 02 निम्नतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की अधिगम शैली में कोई सार्थक अंतर नहीं है।

सांख्यिकी विधियाँ

1)     अनुसंधान प्रकारः - वर्णनात्मक सर्वेक्षण विधि

2)     न्यादर्शः- अध्ययन के लिए कुल 200 विद्यार्थियों का चयन किया गया, जिनमें 100 बालक एवं 100 बालिकाएँ सम्मिलित थीं। नमूने का चयन यादृच्छिक पद्धति के माध्यम से किया गया, जिससे निष्कर्षों की वस्तुनिष्ठता सुनिश्चित की जा सके।

3)     प्रस्तुत अध्ययन में आंकडों के विश्लेषण हेतु मध्यमान, मानक विचलन एवं क्रान्तिक अनुपात आदि सांख्यिकी को प्रयुक्त किया गया है।

4)     शोध हेतु प्रयुक्त उपकरण-

क्र.सं.

उपकरण

निर्माता

1

अभिभावक शैली

आर.एल.भारद्वाज, एच शर्मा

2

अधिगम शैली,

डॉ. करूणा शंकर मिश्रा

 

विश्लेषण- अधिकतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की अधिगम शैली का तुलनात्मक अध्ययन करना।

परिकल्पना 01 अधिकतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की अधिगम शैली में कोई सार्थक अंतर नहीं है।

तालिका 1

समूह

संख्या

लिंग

माध्य

मानक विचलन

स्वतंत्रता के अंश पर

क्रान्तिक अनुपात

सार्थकता स्तर

अधिकतम हस्तक्षेप वाले अभिभावक

100

बालक

21

7.29

198

1.42

0.05

100

बालिका

23

7.21

 

उपर्युक्त तालिका संख्या (1) अधिकतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की अधिगम शैली का माध्य 97 तथा 99 है एवं मानक विचलन 7.29 तथा 7.21 है इसके आधार पर क्रांतिक अनुपात 0.99 प्राप्त हुआ है जो (DF) 198 स्वतंत्रता के अंश पर 0.05 सार्थकता स्तर के मान 1.98 से कम है। अतः निर्धारित शून्य परिकल्पना स्वीकृत की जाती है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि अधिकतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की अधिगम शैली में कोई सार्थक अंतर नहीं है।

परिकल्पना 02 निम्नतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की अधिगम शैली में कोई सार्थक अंतर नहीं है।

तालिका 2

समूह

संख्या

लिंग

माध्य

मानक विचलन

स्वतंत्रता के अंश पर

क्रान्तिक अनुपात

सार्थकता स्तर

निम्नतम हस्तक्षेप वाले अभिभावक

100

बालक

20

7.14

198

2.79

0.05

100

बालिका

23

11.05

 

 

उपर्युक्त तालिका (2)निम्नतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की अधिगम शैली का माध्य 20 तथा 23 है एवं मानक विचलन 7.14 तथा 11.05 है इसके आधार पर क्रांतिक अनुपात 2.79 प्राप्त हुआ है जो कि (DF) 198 स्वतंत्रता के अंश पर 0.05 सार्थकता स्तर के मान 1.98 से अधिक है अतः निर्धारित शुन्य परिकल्पना अस्वीकृत की जाती है इस आधार पर कहा जा सकता है कि निम्नतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की अधिगम शैली में कोई सार्थक अंतर नहीं है। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि निम्नतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों की बालिकाओं की अधिगम शैली अधिक है बालकों की तुलना में।

 

निष्कर्ष

परिकल्पनाओं के सत्यापन और आंकड़ों के विशलेषण के आधार पर शोध के निष्कर्ष इस प्रकार हैं- प्राप्त आँकड़ों के विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि अधिकतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालक-बालिकाओं की अधिगम शैली में कोई सार्थक अंतर नहीं पाया गया। वहीं न्यूनतम हस्तक्षेप की स्थिति में बालिकाओं की अधिगम शैली बालकों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई। इससे यह संकेत मिलता है कि संतुलित एवं सीमित अभिभावकीय हस्तक्षेप बालकों के अधिगम विकास के लिए अधिक उपयुक्त होता है।.

  

सन्दर्भ ग्रन्थ सूची

Agrawal, J. C. (2009). Educational Technology and Management (शैक्षिक तकनीकी एवं प्रबंध के आधार). Agrawal Publications.

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Bhargava, M. P. D., and Singh, T. (2006). Fundamental Statistics in Psychology and Education (मनोविज्ञान एवं शिक्षा में सांख्यिकी के मूल आधार). H. P. Bhargava Book House.

Sharma, N. K. (2007). Educational technology (शिक्षा तकनीकी). Chawla Offset Printers.

Sharma, R. A. (2006). Educational Research (शैक्षिक अनुसंधान). Lalita Publications.

Verma, S. K., and Srivastava, R. K. (2003). Learning Style Inventory (अधिगम शैली मापन पैमाना). National Psychological Corporation.

     

 

 

 

 

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