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MANNU BHANDARI'S FEMINIST PERSPECTIVE IN HINDI FICTION A CRITICAL STUDY

MANNU BHANDARI'S FEMINIST PERSPECTIVE IN HINDI FICTION A CRITICAL STUDY

हिंदी कथा साहित्य में मन्नू भंडारी की स्त्री दृष्टि: एक आलोचनात्मक अध्ययन

 

Veena Chhangani 1, Pritam Yadav 2

 

1 Dean, Department of Humanities and Arts, Apex University, Jaipur, India

2 Department of Humanities and Arts, Apex University, Jaipur, India

 

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ABSTRACT

English: Among the women writers who have played a significant role in establishing feminist discourse as a powerful intellectual trend in Hindi fiction, Mannu Bhandari's name is particularly noteworthy. She not only gave voice to women's mental, social, and familial struggles in her literature but also presented women as independent and self-aware individuals. This research paper provides an in-depth analysis of Mannu Bhandari's feminist perspective through her major works of fiction, focusing on themes such as female identity, self-reliance, social realities, family conflicts, and the complexities of male-female relationships.

 

Hindi: हिंदी कथा साहित्य में स्त्री विमर्श को एक सशक्त वैचारिक प्रवृत्ति के रूप में उभारने में जिन लेखिकाओं की भूमिका उल्लेखनीय रही है, उनमें मन्नू भंडारी का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने न केवल स्त्री के मानसिक, सामाजिक एवं पारिवारिक संघर्षों को साहित्य में अभिव्यक्ति दी, बल्कि स्त्री को एक स्वतंत्र और आत्मचेतस इकाई के रूप में प्रस्तुत किया। यह शोध-पत्र मन्नू भंडारी की प्रमुख कथा-कृतियों के माध्यम से उनकी स्त्री दृष्टि का गहन विश्लेषण करता है, जिसमें नारी अस्मिता, आत्मनिर्भरता, सामाजिक यथार्थ, पारिवारिक द्वंद्व और स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिलताओं को केंद्र में रखा गया है।

 

Received 07 June 2025

Accepted 08 July 2025

Published 31 August 2025

DOI 10.29121/granthaalayah.v13.i8.2025.6527  

Funding: This research received no specific grant from any funding agency in the public, commercial, or not-for-profit sectors.

Copyright: © 2025 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.

With the license CC-BY, authors retain the copyright, allowing anyone to download, reuse, re-print, modify, distribute, and/or copy their contribution. The work must be properly attributed to its author.

 

Keywords: Mannu Bhandari, Female Vision, Female Discussion, Hindi Fiction, Female Identity, Self-Reliance, Social Reality, Female Consciousness, मन्नू भंडारी, स्त्री दृष्टि, स्त्री विमर्श, हिंदी कथा साहित्य, नारी अस्मिता, आत्मनिर्भरता, सामाजिक यथार्थ, स्त्री चेतना


1.   प्रस्तावना

बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हिंदी कथा साहित्य में स्त्री लेखन की एक सशक्त धारा उभरी, जिसने नारी के जीवन अनुभवों को केंद्र में रखकर साहित्य को एक नया आयाम प्रदान किया। इस संदर्भ में मन्नू भंडारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने मध्यवर्गीय समाज की उस स्त्री की कथा कही जो परंपराओं और सामाजिक बंधनों के बीच अपने अस्तित्व की तलाश में संघर्षरत है। उनकी लेखनी में स्त्री केवल सामाजिक या पारिवारिक प्राणी नहीं, बल्कि एक जागरूक, प्रश्नाकुल और विवेकशील इकाई बनकर उभरती है।

 

2.   साहित्यिक पृष्ठभूमि

हिंदी कथा साहित्य में नई कहानी आंदोलन ने यथार्थ और व्यक्ति केंद्रित रचनाओं को बढ़ावा दिया। इस आंदोलन के माध्यम से साहित्य में सामाजिक, आर्थिक और लैंगिक असमानताओं पर विचार होने लगा। मन्नू भंडारी ने इसी आंदोलन के वातावरण में अपने लेखन की शुरुआत की और स्त्री के यथार्थ को अपनी कथा-कृतियों का केंद्रीय विषय बनाया।

 

3.   मन्नू भंडारी की साहित्यिक यात्रा

मन्नू भंडारी का कथा साहित्य उपन्यासों और कहानियों के माध्यम से समृद्ध हुआ है। उनकी प्रमुख कृतियाँ इस प्रकार हैं:

·        आपका बंटी: एक तलाकशुदा स्त्री और उसकी मानसिक स्थिति का चित्रण।

·        स्वामी: पारंपरिक विवाह संस्था में स्त्री की चेतना और अस्मिता का संघर्ष।

·        महाभोज: राजनीति और सामाजिक अन्याय के परिप्रेक्ष्य में स्त्री की दशा।

·        एक इंच मुस्कान (राजेंद्र यादव के साथ): स्त्री-पुरुष संबंधों की संवेदनशील प्रस्तुति।

·        यही सच है, त्रिशंकु, बिना दीवार का घर: आत्मचेतस स्त्रियों की कहानियाँ।

 

4.   स्त्री दृष्टि के प्रमुख तत्व

4.1.      नारी अस्मिता की खोज

मन्नू भंडारी की नायिकाएँ अपने अस्तित्व के लिए सजग हैं। आपका बंटी की शालिनी एक शिक्षित, आत्मनिर्भर और अपने निर्णयों पर अडिग स्त्री है। वह समाज की दृष्टि से अधिक अपने आत्मसम्मान को प्राथमिकता देती है।

 

4.2.      पारिवारिक द्वंद्व

उनकी कृतियों में पारिवारिक संबंधों की जटिलता और उसमें स्त्री की स्थिति का यथार्थ चित्रण मिलता है। स्वामी की सौदामिनी विवाह के बंधन में बँधने के बाद अपने आत्मचिंतन और स्वतंत्र सोच के माध्यम से एक नए दृष्टिकोण को जन्म देती है।

 

4.3.      सामाजिक यथार्थ

महाभोज में मन्नू भंडारी स्त्री को केवल घर तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि वह सामाजिक अन्याय और सत्ता के खेल में भी पीड़ित और संघर्षशील दिखाई देती है। यह उपन्यास स्त्री के सामूहिक उत्पीड़न की कथा है।

 

4.4.      आत्मनिर्भरता और निर्णय क्षमता

मन्नू भंडारी की स्त्रियाँ विवेकशील हैं। वे जीवन के निर्णय खुद लेती हैं। यही सच है की नायिका तर्क और विवेक के आधार पर निर्णय लेती है, न कि केवल भावनाओं के प्रभाव में।

 

4.5.      स्त्री-पुरुष संबंधों की यथार्थता

एक इंच मुस्कान में संवादहीनता और असुरक्षा जैसे विषयों को बड़ी संवेदनशीलता से उभारा गया है। मन्नू भंडारी स्त्री को संबंधों की गुलाम नहीं, बल्कि स्वतंत्र सोच रखने वाले व्यक्ति के रूप में चित्रित करती हैं।

 

5.   प्रमुख रचनाओं में स्त्री दृष्टि का विश्लेषण

5.1.      आपका बंटी

शालिनी तलाक के बाद भी अपने जीवन को स्वाभिमानपूर्वक जीने का निर्णय लेती है। यह उपन्यास नारी की मातृत्व भावना और अस्तित्व के द्वंद्व को बहुत ही गहराई से चित्रित करता है।

 

5.2.      स्वामी

सौदामिनी का चरित्र एक संवेदनशील, आत्मचिंतनशील स्त्री का प्रतिनिधित्व करता है, जो परंपरा से टकराते हुए अपने आत्मसम्मान की रक्षा करती है।

 

5.3.      महाभोज

यह उपन्यास सामाजिक-राजनीतिक परिवेश में स्त्री की भूमिका को उजागर करता है। दलित और हाशिए की स्त्रियों की पीड़ा को इसमें अत्यंत मार्मिक ढंग से उभारा गया है।

 

5.4.      यही सच है

यह कहानी स्त्री के विवेक और आत्मबल की मिसाल है, जहाँ प्रेम से अधिक महत्वपूर्ण आत्मसम्मान है।

 

6.   समकालीनता और प्रासंगिकता

आज जब स्त्री समानता, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में संघर्षरत है, तब मन्नू भंडारी की स्त्री दृष्टि और भी प्रासंगिक हो जाती है। उनके पात्र आज की नारी की आकांक्षाओं, द्वंद्वों और निर्णय क्षमताओं को व्यक्त करते हैं। उनके साहित्य में नारी केवल सहन करने वाली नहीं, बल्कि परिवर्तन की वाहक बनकर सामने आती है।

 

7.   आलोचनात्मक दृष्टिकोण

कुछ आलोचकों का मानना है कि मन्नू भंडारी का लेखन शहरी और शिक्षित स्त्रियों तक सीमित है, परंतु महाभोज जैसी रचनाएँ इस दृष्टिकोण को चुनौती देती हैं। उनकी भाषा सरल, संवादप्रधान और पात्रों की संवेदनाओं से भरी हुई है। उनकी कहानियाँ पाठकों को गहरे स्तर पर स्पर्श करती हैं।

 

8.   निष्कर्ष

मन्नू भंडारी की स्त्री दृष्टि हिंदी कथा साहित्य में नारी विमर्श को एक नई दिशा देने में सफल रही है। उन्होंने स्त्री को एक स्वतंत्र, जागरूक और आत्मनिर्भर इकाई के रूप में चित्रित किया। उनकी रचनाएँ न केवल साहित्यिक मूल्य रखती हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव की चेतना भी उत्पन्न करती हैं। यह शोध-पत्र इस तथ्य को पुष्ट करता है कि मन्नू भंडारी का साहित्य स्त्री विमर्श की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और कालजयी है।

 

CONFLICT OF INTERESTS

None. 

 

ACKNOWLEDGMENTS

None.

 

REFERENCES

Bhandari, M. (1971). Aapka Bunty (आपका बंटी). Rajkamal Prakashan.

Bhandari, M. (1979). Mahabhoj (महाभोज). Rajkamal Prakashan.

Bhandari, M. (1982). Swami (स्वामी). Rajkamal Prakashan.

Bhandari, M., & Yadav, R. (1961). Ek Inch Muskan (एक इंच मुस्कान). Rajkamal Prakashan.

Bhandari, M. (1965). Yehi Sach Hai (यही सच है).

Mishra, P. (n.d.). Hindi Ki Naariwadi Lekhikaein (हिंदी की नारीवादी लेखिकाएँ). Sahitya Bhandar.

Chaturvedi, H. (n.d.). Hindi Katha Sahitya Mein Stree Chetna (हिंदी कथा साहित्य में स्त्री चेतना). Prakashan Sansthan.

Verma, U. (n.d.). Mannu Bhandari Ka Katha Sahitya Aur Stree Vimarsh (मन्नू भंडारी का कथा साहित्य और स्त्री विमर्श). Naveen Publishers.

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