तीव्र जनसंख्या वृद्धि पर्यावरणीय ह्रास प्रमुख कारणों में से एक है । वास्तव में मानव जनसंख्या में वृद्धि के परिणाम स्वरूप कृषि क्षेत्रों में विस्तार, नगरीकरण, गहन औद्योगिकरण आदि परिघटनाएं होती हैं जो पर्यावरण अवनयन एवं पारिस्थिति की असंतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गाजीपुर उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में गंगा नदी द्रोणी में अवस्थित एक जिला है जिसका जिला मुख्यालय गाजीपुर है । इसका अक्षांशीय विस्तार 25° 19′और 25° 54′एवं देशांतरीय 83° 4′और 83° 58′ के बीच है जिसका क्षेत्रफल 3577 वर्ग किलोमीटर है। जनपद की कुल जनसंख्या सन 2011 की जनगणना के अनुसार 3620268है। मुख्य रूप से द्वितीयक आंकड़ों के आधार पर इस शोध पत्र के विषय वस्तु का अध्ययन किया गया है। मानचित्र के निर्माण के लिए ArcGIS 10.1 एवं आंकड़ों के विश्लेषण के लिए एम० एस० एक्सेल 2016 का प्रयोग किया गया है। जनगणना संबंधी आंकड़े भारतीय जनगणना 2011 से प्राप्त किया गया है। लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण देश की अति सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव के प्रमुख कारण के रूप में भारत में तेज गति से बढ़ती जनसंख्या को माना जाता है जिसके कारण पर्यावरण की वहनीय क्षमता संतृप्त होती जाती है एवं मानवीय आवश्यकता एवं पारिस्थितिकी संतुलन के बीच खाई बड़ी होती जा रही है। तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तकनीक एवं प्रौद्योगिकी का विकास वांछनीय है फिर भी तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी के विकास के परिणाम स्वरूप पर्यावरणीय शोषण एवं प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तीव्र गति से हुआ है जो कि हमारे औद्योगिक विकासए नगरी विस्तार कृषि क्षेत्र में विकास एवं विस्तार तथा यातायात एवं संचार के माध्यमों के विकास के रूप में परिलक्षित हो रहा है। यद्यपि इन सभी पहलुओं का विकास आवश्यक है फिर भी हमें वर्तमान पीढ़ी के विकास करने के क्रम में भविष्य में आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं को भी निरंतर संज्ञान में रखना चाहिए जिससे कि धारणीय विकास की संकल्पना साकार हो सके।
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