भोतिकवादी पृवत्ति के वशीभूत हो इसांन अपनी सुख सुविधाओं में अधिकाधिक वृद्वि करने के उददेश्य से प्राकृतिक संपदाओ का अविवेक पूर्ण दोहन जिस गति से कर रहा है, उसमें पर्यावरण का ताना बाना चरमरा रहा है । जीवन दायी तत्वों का दाता प्राकृतिक पर्यावरण आज अत्यधिक देाहन, असीमित मात्रा में निकलते गंदे और उत्सर्जित पदार्थो के कारण संकटमय स्थिति में पहुंच गया है । इससे न सिर्फ मानव वस्तु अपितु संपूर्ण पृथ्वी पर संकट छाया हुआ है । इसलिये पर्यावरण को संरक्षित करना एवं प्रदुषण को नियंत्रित करना देश की एक व्यापक जिम्मेदारी बन गई है।
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