आज धरती माॅं का दुःख सर्वविदित है। उसे संभाले रखने वाले तत्व-जल, वनस्पति,आकाश और वायु, विकास की चिमनियों से निकलने वाले धुएं के कारण हांप रहे हैं ।
भू-मण्डलीकरण की लालची जीभ ने इन सभी तत्वों को बाजार में सुन्दर पैकिंग में भर व्यापार की वस्तु के रूप में पेश कर दिया है । इन चारों के कम होने से पाॅंचवे अंग यानी अग्नि ने आज पूरी धरती को भीतर-बाहर से घेर लिया है । जिसके कारण धरती का भीतर-बाहर सब तपने...
मनुष्य अपनी सुख समृद्धि, भोग एवं महत्वकांक्षाओं की पूर्ति हेतु जिस तरह प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यावरणीय तत्वों का अनियोजित एवं अनियन्त्रित प्रयोग कर रहा है, इस कारण पयावरणीय विघटन एवं असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जल, वायु, भूमि, वन एवं खनिज संजीवनी का निरन्तर विघटन हो रहा है, जल स्त्रोत सूख रहे है, वातावरण विषाक्त हो रहा है और भूमि का क्षरण भी हो रहा है। वनों के विनाष से पर्यावरण ह्ास में...
प्रस्तुत शोध का विषय छात्रों एवं छात्राओं की पर्यावरण के प्रति जागरूकता एवं अभिवृत्ति का अध्ययन करना है ।
जागरूकता जानने हेतु सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया इन्दौर शहर के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के 11 वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों का चयन यदृच्छिक विधि द्वारा किया गया । न्यादर्ष में 400 छात्र एवं 400 छात्राएँ कक्षा 11वीं एवं 12वीं शासकीय एवं अषासकीय विद्यालयों से लिये गये । इसमें पर्यावरण...
आज पर्यावरण से ही हर व्यक्ति जीवजंतु एंव वनस्पतियों को जीवन मिल रहा है, परंतु पर्यावरण की स्थिति ऐसी हो गई है कि जिसे संभालना बहुत मुश्किल हो गया है। प्रस्तुत शोध आलेख वर्तमान में पर्यावरण की कौन-कौन सी समस्याएं हैं और उसका निराकरण एवं समाधान कैसे किया जाये के उद्देश्य से प्रस्तुत है। आज पर्यावरणीय समस्याओं में जनसंख्या वृद्धि, प्रदूषण, वैश्विक ताप, समुद्र प्रदूषण, ओजान परत का क्षतिग्रस्त होना,...
आर्थिक विकास केेेेेेेेेेेेेेेेेे दृ्रष्टिकोण से ऊर्जा एक अत्यन्त महत्वपूर्ण अवस्थापना/इन्फ्रास्ट्रक्चर/ है। प्रकृति के पारिस्थितिक संतुलन में ऊर्जा की मुख्य भूमिका रहती है, जो प्राकृतिक परिवेश के जैविक तथा अजैविक घटकों के मध्य अन्तःक्रिया बनाए रखती है। मनुष्य विकास को मात्र आर्थिक एवं भौतिक विकास मानकर लक्ष्य की प्रतिपूर्ति के लिए तीव्र गति वाली तकनीक का आविष्कार कर प्राकृतिक संसाधनो के अंधाध्ंाुध...